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इतनी सी गुजारिश…….बेटे को बस इंजीनियर मत बनाना

समझदारी दिखायें….बच्चों को इंजीनियरिंग डिग्री के लिए न करें मजबूर उत्तम सिंह मटेला हल्द्वानी। मैं वर्षों एक कंपनी में एचआर हेड के पद पर रहा हूं। इससे पहले भी कई दूसरी कंपनियों में इसी पद को धारण करता रहा हूं। मेरी नौकरी के इन वर्षों के दौरान मुझे अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, परिचितों. बड़े और छुटभैया […]

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chmpa kothari

मेरा पहाड़ के लागी गै नजर, छोड़ि बे ए गई सबै भाबर

मेरा पहाड़ के लागी गै नजर चम्पा कोठारी     मेरा पहाड़ के लागी गै नजर छोड़ि बे ए गई सबै भाबर दूसरी कुड़ि में किराई दीनी बिजली, पाणी राशन मोल लीनी बांज पड़ गइ नौला गध्यार छोड़ि के ए गई सबै भाबर मेरा पहाड़ के लागी गै नजर गौ में कतु मेल मिलाप हुंछी […]

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bhimeaw

डा. भीमराव अंबेडकर ने सिखाया था समाज को एक हो जाना

फूट डालकर राज करने वालों को मुंहतोड़ जवाब मिलना चाहिए श्याम दत्त पांडे हल्द्वानी। जिस प्रकार चोर को चांदनी रातें नहीं सुहाती हैं, उसी तरह राजनैतिज्ञों को सर्वत्र सुख, चैन, अमन, भाईचारा नहीं सुहाता है। एक प्राचीन कहावत है नाम कमाने या शार्टकट का आसान तरीका क्या है, चैराहे पर गंदगी उत्पन्न कर दो, खाई […]

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आरक्षण की तस्वीर

जब प्रधानमंत्री झाडू पकड़ सकते हैं तो पंडित, ठाकुरों के युवा गटर साफ क्यों नहीं कर सकते

आरक्षण पर टकराव ठीक नहीं, ठाकुर, पंडित भी पकड़े झाडू चंदशेखर जोशी हल्द्वानी। यदि आरक्षण की खिलाफत हो तो सबसे पहले वाल्मीकि और दलित जातियों का सदियों से सफाई में जन्मजात आरक्षण खत्म किया जाए। सफाई कार्य में सवर्णों की भर्ती हो। जब देश के प्रधानमंत्री झाडू पकड़ सकते हैं तो पंडित, ठाकुरों के युवा […]

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gift

बेटी की इंजीनियर पापा को सरप्राइज पार्टी

कुछ अच्छी परिपाटियां जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत शेखर बेंजवाल हल्द्वानी। हमारे समाज में रिटायरमेंट का मतलब होता है बुढापे के आगमन की सरकारी घोषणा हो जाना। रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर बच्चे तो यह मान बैठते हैं कि अब मां-बाप उन पर बोझ बनने वाले हैं। लेकिन इस सामान्य अवधारणा के विपरीत कुमाऊं मंडल […]

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हिरन के बच्चे को दूध पिलाती महिला

हिरणों को अपना दूध पिलाती हैं ये मांएं

हिसार। अगर सलमान खान काला हिरण कांड पांच साल के लिए जेल भेजे गए हैं तो इसमें बहुत बड़ा योगदान बिश्नोई समाज का है। राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैला बिश्नोई समाज अपने आराध्य गुरु जम्भेश्वर जी के बताए 29 नियमों का पालन करते हैं। इनमें से एक नियम […]

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sansad

खर्चा 210 करोड़, चर्चा सिर्फ डेढ़ मिनट

नई दिल्ली। मोदी सरकार के चौथे और आखिरी बजट को पारित करने के लिए बुलाए गए सत्र का समापन हो गया। आपने अपने सांसदों को बड़े अरमानों व अपेक्षा के साथ संसद में भेजा था कि वे आपके मुद्दे संसद में उठाएंगे। लेकिन संसद के इस सत्र की ही बानगी देखिए कि संसद में चुनकर […]

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पढ़ने की उम्र में झाडू उठाने को मजबूर बच्चा

अब उठा ले मेरे बच्चे हमारा खानदानी झाडू़

समाज की हर जिद सहन करना इस प्यारे बच्चे का फर्ज बना चंद्रशेखर जोशी हल्}ानी। 17 साल का सोनू 10 दिन पहले तक जरा जिद्दी था। अब समाज की हर जिद सहन करना इस प्यारे बच्चे का फर्ज बना। इंटर की परीक्षा देकर वह इस शहर की सेवा करेगा। इसके बदले हर पल अपमान, जलालत […]

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हल्द्वानी। कुत्ते को वफादार जानवर माना जाता है। आम तौर पर हम कुत्ता पालते हैं तो वह हमारे घर का सदस्य बन जाता है। अब अगर आपका छोटा नौकरीपेशा परिवार है और सारे परिवार को एक साथ ट्रेन में बैठकर कहीं जाना हो तो यह बड़ी समस्या हो जाती है कि आखिर उस कुत्ते को किसके भरोसे छोड़कर जाएं या फिर उसे कैसे साथ ले जाएं। ऐसी ही समस्या से जालंधर की श्रीमती लक्ष्मी सिंह को भी गुजरना पड़ा। लक्ष्मी सिंह बनारस की रहने वाली हैं। उनका ससुराल पटना में है। पति जालंधर में नौकरी पर थे। इकलौता बेटा दिल्ली में बी.टेक कर रहा है। जालंधर में इस परिवार ने ब्रूनो नामक गोल्डन रिटीवर नस्ल का एक कुत्ता पाला हुआ था। इसी बीच इस परिवार के मुखिया का तबादला जालंधर से रायपुर (छत्तीसगढ़) हो गया। अभी छत्तीसगढ़ में जमने में भी समय लगना था। अब दिक्कत यह थी कि कुत्ते का क्या करें। लक्ष्मी सिंह को ब्रूनो से अगाध स्नेह था। ऐसी सलाह भी सामने आई कि कुत्ते को यहीं छोड़ दो। लेकिन लक्ष्मी सिंह ने साफ कह दिया कि वह अपने ब्रूनो को छोड़कर नहीं जाएंगी, भले ही उन्हें जालंधर में अकेला क्यों न रहना पडे़। अंत में फैसला लिया गया कि ब्रूनो को भी साथ ले जाया जाएगा और वह अपने मायके बनारस उसे लेकर जाएंगी। यह तो थी लक्ष्मी सिंह के ब्रनो के प्रति स्नेह की कहानी, पर हम यहां इस कहानी को लिखने का हमारा मकसद यह है कि अगर आपको भी कभी ऐसी स्थिति से गुजरना पड़े तो आपको अपने पालतू कुत्ते को रेल में ले जाने के लिए किन-किन स्थितियों से गुजरना पड़ेगा। अब शुरू होती है ब्रनो की जालंधर से बनारस तक की यात्रा। यात्रा की शुरुआती तैयारी में इस परिवार को पता चला कि जिस प्रकार से मनुष्यों को सफर करने के लिए रिजर्वेशन जरूरी है, उसी तरह कुत्ते को भी ले जाने के लिए कुछ खास प्रक्रिया है। बुकिंग बाबू ने बताया कि अगर कुत्ते को साथ ले जाना है तो रेलगाडी के समय से दो घंटे पहले आना होगा। इसके अलावा कुत्ते का मेडिकल सर्टिफिकेट और उसको यात्रा में साथ ले जाने वाले का आधार कार्ड चाहिए। यह जरूरी नहीं कि हर ट्रेन में कुत्ता ले जाने की व्यवस्था हो ही। कुछ खास ट्रेनों में ही यह व्यवस्था होती है, लिहाजा रिजर्वेशन भी उन्हीं ट्रेनों में मिलेगा। इसके अलावा अगर पीछे से पहले ही उस ट्रेन में कोई और कुत्ता आ रहा है तो इस स्टेशन से आपका कुत्ता नहीं चढ़ाया जाएगा, क्योंकि एक ट्रेन में एक ही कुत्ता ले जाने का प्रावधान है। इतना ही नहीं अगर उसी दिन सेना का कोई कुत्ता जाने वाला होगा तो सामान्य व्यक्ति के कुत्ता भेजने की पूर्व सूचना के बावजूद उसे कुत्ता ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद इस परिवार ने पता किया कि किन-किन रेलगाड़ियों में कुत्ता ले जाने की व्यवस्था है तो मालूम पड़ा कि पंजाब मेल में इसकी व्यवस्था है तो परिवार ने इसी ट्रेन में अपना रिजर्वेशन करवाया गया। इसके बाद कुत्ता भेजने के लिए चीफ पार्सल सुपरिंटेंडेंट (सीपीएस) को लिखित आवेदन दिया गया। इस आवेदन में पीएनआर नंबर, यात्रा तिथि, रेलगाडी, कहां से कहां तक, मोबाइल नंबर आदि का जिक्र जरूरी है। इन औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद सीपीएस ने इसकी सूचना रेलगाडी शुरू होने वाले स्टेशन यानी अमृतसर को भेजी तब कहीं जाकर यह सुनिश्चित हो पाया कि ब्रूनो को ले जाया जा सकता है। कुत्ते को ले जाने के लिए दो घंटे पहले परिवार जालंधर स्टेशन पहुंच गया और क्लाक रूम में उसकी बुकिंग करवाई। यहां से बुकिंग रसीद दी गई और कुत्ते के पट्टे पर कहां से कहां तक जाएगा और ले जाने वाले का मोबाइल नंबर लिखना पड़ा। लंबे गाड़ी में चढ़ाने के बाद बीच-बीच में आकर कुत्ते को उसके कैबिन में आकर पानी-खाना देना पड़ता है, ताकि कोई कठिनाई न हो। अंत में गंतव्य यानी वाराणसी स्टेशन पर कुत्ता उतारा गया और चालान रसीद दिखाकर उसे रेलवे से हासिल किया गया और वहां से लक्ष्मी सिंह अपने मायके के लिए रवाना हुई। अब आप समझ ही गए होंगे कि अपने पालतू कुत्ते को अगर कभी ट्रेन में ले जाना हो तो किन-किन प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए भविष्य के लिए इन जानकारियों को अपने दिमाग में बिठाकर रखिए। नोट यह लेख हमें पंच आखर डेस्क से पंच आखर के सम्पादक चंद्रशेखर बैंजवाल जी के सौजन्य से प्राप्त हुआ है। अगर आपके पास भी है कोई लेख या समाजहित से जुड़ा मुददा जो आपके मन में उठ रहा है तो कलम चलाइए और हमेें मेल कीजिए

ब्रूनो की जालंधर से बनारस यात्रा

हल्द्वानी। कुत्ते को वफादार जानवर माना जाता है। आम तौर पर हम कुत्ता पालते हैं तो वह हमारे घर का सदस्य बन जाता है। अब अगर आपका छोटा नौकरीपेशा परिवार है और सारे परिवार को एक साथ ट्रेन में बैठकर कहीं जाना हो तो यह बड़ी समस्या हो जाती है कि आखिर उस कुत्ते को […]

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General-Science

स्कूल वाले डरते क्यों हैं

मैं एक छोटी सी बच्ची का अभिभावक हूं, जिसे अगले कुछ महीनों में स्कूल में दाखिल करवाना है चंद्रशेखर बैंजवाल हल्द्वानी। मैं एक छोटी सी बच्ची का अभिभावक हूं, जिसे अगले कुछ महीनों में स्कूल में दाखिल करवाना है। मगर मैं छह महीने पहले से ही इस चिंता में घुला जा रहा हूं कि उसके […]

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