रामगाड़ पुल की सुरक्षा दीवार ढही, कभी भी प्रभावित हो सकता है यातायात
अल्मोड़ा। कुमाऊं की लाइफ लाइन कहे जाने वाले भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। लगातार हो रही बारिश के बीच रामगाड़ पुल की सुरक्षा दीवार शिप्रा नदी में समा गई है, जिससे पूरे कुमाऊं की आवाजाही पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। शनिवार देर रात अचानक तेज आवाज के साथ रामगाड़ पुल की करीब 8.50 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार भरभराकर नदी में गिर गई। रात के अंधेरे में यह आवाज सुनकर स्थानीय निवासी लक्ष्मण सिंह मेहरा तुरंत मौके पर पहुंचे और अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर सड़क किनारे पत्थर लगाकर आने-जाने वाले वाहनों को सावधान किया। यह वही राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रानीखेत, धारचूला और हल्द्वानी समेत पूरे कुमाऊं को जोड़ता है। ऐसे में सुरक्षा दीवार के ढहने से हजारों यात्रियों, स्थानीय लोगों और पर्यटकों की चिंता बढ़ गई है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो इस मार्ग के बंद होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
पहले से ही क्वारब क्षेत्र में लगातार भूस्खलन लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। अब रामगाड़ पुल पर मंडराता यह खतरा कुमाऊं के लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। रोजी-रोटी, इलाज, शिक्षा और पर्यटन से जुड़ी हजारों जिंदगियां इसी सड़क पर निर्भर हैं। लोगों का कहना है कि यदि यह मार्ग बंद हुआ तो पूरे क्षेत्र की रफ्तार थम जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है। विभाग का कहना है कि सुरक्षा दीवार की मरम्मत जल्द शुरू की जाएगी और भारी वाहनों की आवाजाही को डायवर्ट करने पर भी विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पुराने पुल के पास नए टू-लेन पुल के निर्माण के लिए खुदाई भी की गई है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी खिसकने से पुराने पुल की नींव पर भी खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोग प्रशासन से तत्काल स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। रामगाड़ पुल पर आया यह संकट केवल एक दीवार के गिरने की घटना नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं की लाइफ लाइन पर मंडराता खतरा है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और मौसम पर टिकी हैं।

