कार्यक्रम को सम्बोधित करते सीडीओ विनीत कुमार

ऐपण बनाने का प्रशिक्षण शुरू, संस्कृति का होगा संरक्षण, स्वरोजगार के खुलेंगे द्वार

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डीएम बंसल की पहल पर भीमताल में 21 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
कुमाऊं जनसंदेश डेस्क
भीमताल। उत्तराखंड की संस्कृति में ऐपण का विशेष महत्व होने के साथ ही विशिष्ट पहचान भी है। संस्कृति संरक्षण के साथ ही स्वरोजगार उपलब्ध हो और पलायन पर भी लगाम लग सके, इस मकसद से जिलाधिकारी सविन बंसल और सीडीओ विनीत कुमार की पहल पर विकास भवन, भीमताल में तीस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। उद्यमी मित्र संस्था निर्मला सोशियल रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसायटी के मास्टर ट्रेनर संजीव भटनागर तीस युवती व महिलाओं को 21 दिनों तक विभिन्न ऐपण कलाओं की बारीकियों से रुबरू कराएंगे।

ऐपण कला के कुछ आकर्षक डिजायन
ऐपण कला के कुछ आकर्षक डिजायन

लोक संस्कृति पर आधारित उत्पादों की काफी मांग: सीडीओ
सोमवार को विकास भवसन सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ आईएएस विनीत कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में लोक संस्कृति पर आधारित उत्पादों की काफी मांग है। ऐसे में ऐपण का हुनर सीखकर महिलाएं व युवतियां आत्मनिर्भर बन सकती हैं। बाजार दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव उनकी मदद की जाएगी। कहीा कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें ताकि ऐपण कला की विधा में निपुण हो सकें।

आने वाला समय स्वरोजगार काः जीएम
वहीं जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रंधक विपिन कुमार ने कहा कि आने वाला समय स्वरोजगार का ही है। लोक संस्कृति से जुड़ा स्वरोजगार न केवल सभी लोगों को संस्कृति से जोड़ता है बल्कि आय सृजन का जरिया भी बनता है। कहा कि उद्योग विभाग बेरोजगारों व स्वरोजगार करने के इच्छुक लोगों की मदद के लिए तैयार है। इसके लिए सरकार से तमाम स्वरोजगारपरक योजनाओं का भी संचालन किया जा रहा है।
इस दौरान सहायक प्रबंधक ओपी भटट, मोहित कुमार सहित तमाम लोग मौजूद थे।

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