5 पांच बेटियों के बाद बेटे का जन्म, प्रसव के कुछ घंटे बाद मां की मौत

पांच बेटियों के बाद बेटे का जन्म, प्रसव के कुछ घंटे बाद मां की मौत

उत्तराखण्ड ताजा खबर बागेश्वर
खबर शेयर करें

बेटे के जन्म के कुछ घंटे बाद ही महिला की मौत, मातम में बदली खुशियां
बागेश्वर। बागेश्वर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करती है। पांच बेटियों के बाद बेटे की चाहत, घर-समाज की उम्मीदें, और इसी उम्मीद में छठी बार मां बनी 35 वर्षीय भावना देवी। भावना ने बेटे को जन्म तो दिया, लेकिन बेटे का चेहरा देखने के कुछ ही घंटे बाद उनकी जिंदगी की सांसें थम गईं। एक मां, जिसने अपने परिवार की उम्मीद पूरी कर दी, लेकिन खुद हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गई। यह दर्दनाक घटना बागेश्वर जिले के गरुड़ ब्लॉक के सेलाबगड़ मेगड़ीस्टेट गांव की है। 35 वर्षीय भावना देवी पांच बेटियों की मां थीं। परिवार में बेटे की चाहत थी। इसी उम्मीद के साथ भावना छठी बार गर्भवती हुईं। गर्भावस्था की संभावित प्रसव तिथि 13 अगस्त थी, लेकिन 9 अगस्त की शाम अचानक उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। आशा कार्यकर्ता भावना बिष्ट उन्हें निजी वाहन से शाम करीब साढ़े पांच बजे सीएचसी बैजनाथ लेकर पहुंचीं। रात करीब 7 बजकर 32 मिनट पर भावना ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
उस वक्त मां और बच्चा दोनों ठीक बताए जा रहे थे। परिवार में बेटे के जन्म की खुशी थी, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। प्रसव के कुछ घंटे बाद ही भावना की तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। जिस घर में कुछ घंटे पहले बेटे के जन्म की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अचानक मातम छा गया। सीएचसी बैजनाथ की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सपना राजपूत के अनुसार, भावना की 25 जुलाई को स्वास्थ्य जांच हुई थी। जांच में उनके शरीर में खून की कमी पाई गई थी और उनकी गर्भावस्था को हाई रिस्क यानी अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया था। डॉक्टरों के अनुसार प्रसव के समय तक स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन प्रसव के कुछ घंटे बाद हुई उनकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

सोचिए जिस मां ने नौ महीने तक अपने बच्चे को गर्भ में रखा, जिसने पांच बेटियों को जन्म देकर उन्हें पाला, जिसने छठी बार भी प्रसव पीड़ा सहकर एक बेटे को जन्म दिया, उसी मां की गोद में बेटे का भविष्य तो आया लेकिन वह मां खुद उस भविष्य को देखने के लिए दुनिया में नहीं रही। यह सिर्फ भावना की मौत की कहानी नहीं है।
यह उस सोच पर भी सवाल है, जहां आज भी बेटे को परिवार की जरूरत और बेटी को बोझ समझने की मानसिकता कहीं न कहीं जिंदा है।

 

Follow us on WhatsApp Channel

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *