इस बस्ती में एक बस्ती है….
धूल, मिट्टी, गंदगी में बसेरा, दिनभर की लानत, न घर का पता और न परिवार का। ये कौन हैं, कहां के हैं, कैसे जीवन बसर करते हैं, इसबारे में सोचना भी पाप से कम नहीं है। इनका सरकार के पास भी कोई रिकार्ड नहीं। ये इंसान बेघर, बेदर, बेबस क्यों हैं.. …रेलवे लाइनों, नदी-तालाब किनारे […]
पूरी खबर पढ़ें