नैनीताल। उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत का प्रतीक श्री नंदा देवी महोत्सव वर्ष 2026 में अपने 124वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। महोत्सव के सफल आयोजन को लेकर रविवार को सभा भवन में मातृ शक्ति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मनोज साह ने की, जबकि संचालन जगदीश बावड़ी एवं प्रो. ललित तिवारी ने किया।
बैठक में पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी, पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, दर्जा राज्य मंत्री शांति मेहरा एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चक्रधर बहुगुणा ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान महोत्सव की तैयारियों, व्यवस्थाओं और मातृ शक्ति की भूमिका को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि महोत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए नैनीताल के सभी घरों में झंडे और कैलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। वक्ताओं ने महोत्सव के आयोजन में मातृ शक्ति के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही महोत्सव के दौरान नगर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर भी व्यापक चर्चा की गई।
16 सितंबर से शुरू होंगे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
बैठक में महोत्सव के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की गई। इसके अनुसार 16 सितंबर को सभा भवन में महोत्सव का उद्घाटन होगा। 17 सितंबर को कदली नगर भ्रमण, 18 सितंबर को मूर्ति निर्माण के साथ सभा भवन में बच्चों की क्विज एवं लोकगीत प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
19 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति स्थापना, 20 सितंबर को हवन, 21 सितंबर को महाभंडारा तथा 22 सितंबर को सुंदरकांड एवं भजन कार्यक्रम होंगे। 23 सितंबर को डोला नगर भ्रमण एवं विसर्जन के साथ महोत्सव का समापन होगा।
बैठक में महाभंडारे की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा की गई। बताया गया कि सोमवार को एसडीएम नैनीताल की अध्यक्षता में सभा भवन में अधिकारियों के साथ महोत्सव की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित की जाएगी। वहीं, 30 अगस्त को नैनीताल के नागरिकों तथा युवाओं के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बैठक में बड़ी संख्या में मातृ शक्ति के साथ अशोक साह, राजेंद्र बिष्ट, बिमल चौधरी, बिमल साह, भुवन बिष्ट, हरीश राणा, मोहित लाल साह, दिनेश भट्ट, गोधन सिंह, मिथिलेश पांडे, धर्मेंद्र शर्मा, सभासद लता दफौटी, गज़ाला कमाल, गीता उप्रेती, शीतल कटियार, गीता बिष्ट, विवेक वर्मा, प्रदीप जेठी, पुष्पा बावरी, रेशमा टंडन, सुनीता वर्मा, राजेंद्र लाल साह, देवेंद्र लाल साह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

