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दो से अधिक बच्चों वाले पंचायत चुनाव के दावेदारों के लिए अहम रहेगा गुरुवार का दिन, जानें क्यों

उत्तराखण्ड ताजा खबर नैनीताल

उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल में मामले में होगी सुनवाई
नैनीताल। गुरुवार का दिन ऐसे लोगों के लिए काफी अहम रहेगा जो पंचायत चुनाव लड़ना चाहते हैं मगर उनके दो से अधिक बच्चे हैं। इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल में गुरुवार को सुनवाई का दिन निर्धारित किया गया है। दो से अधिक बच्चे वालों को पंचायत चुनाव लड़ने के अयोग्य मानने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं में हाईकोर्ट गुरुवार (19 सितंबर) को सुबह सवा दस बजे फैसला सुनाएगा। इन याचिकाओं की हाईकोर्ट ने 22 अगस्त को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

अलग-अलग कारणों से दायर हुई हैं याचिकाएं
नैनीताल। दो से अधिक बच्चों के मामले में हाईकोर्ट में अलग-अलग कारणों से याचिकाएं दायर की गई हैं। सरकार के दो से अधिक बच्चों वालों के चुनाव लड़ने से रोक सम्बंधी शासनादेश को मनोहर लाल आर्या निवासी नया गॉव कालाढूंगी, कांग्रेस नेता जोत सिंह बिष्ट, घोषिया रहमान सहित कई अन्य लोगों ने अलग-अलग कारणों से हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि राज्य सरकार द्वारा 2019 में पंचायती राज एक्ट में संशोधन किया गया है, जिसमें सरकार ने दो से अधिक बच्चे वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया है, जो गलत है। सरकार द्वारा इस संशोधन को बदलाव के बाद पिछली तारीख से लागू कराया जा रहा है जो नियम विरुद्ध है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर किसी एक्ट में बदलाव किया जाता है तो उसको लागू करने से पूर्व 300 दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाता है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा यह ग्रेस पीरियड उनको नहीं दिया जा रहा है।

यह भी दी है दलील
नैनीताल। हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दो से अधिक बच्चों वाले को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित करने से पहाड़ी क्षेत्रों में पंचायतों के उम्मीदवार मिलना मुश्किल हो जाएगा। वहीं याचिकाओं में उम्मीदवार की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल उत्तीर्ण होने को भी चुनौती दी है। एक्ट के संसोधन में यह भी कहा गया है कि कोआपरेटिव सोसायटी के सदस्य भी दो से अधिक बच्चे होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, लेकिन गांवों में प्रत्येक सदस्य कोई न कोई कोआपरेटिव सोसायटी का सदस्य होता है। इन सब मामलों को लेकर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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