
अंतिम दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे पलड़ा गांव
भीमताल। पदमपुरी के सोमवारी महाराज के अनन्य भक्त श्रीश्री 1008 स्वामी परमानंद पुरी का मंगलवार रात हल्द्वानी में 138 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार को धारी ब्लॉक के पलड़ा स्थित सोमवारी गुफा में संत परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि दी गई। इस दौरान अटल महाराज समेत कई साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

कई सालों से महाराज की सेवा करते आ रहे उनके भक्त चन्द्रमोहन पनेरू ने बताया कि स्वामी परमानंद पुरी के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया। बताया जाता है कि स्वामी परमानंद पुरी की शिक्षा लंदन में हुई थी। उन्होंने वर्ष 1919 में लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमडी-एमएस की शिक्षा पूरी की। इसके बाद वर्ष 1920 में भारत लौटकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में नैनीताल जिले के जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यभार संभाला। वर्ष 1930 में उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया और अपना जीवन आध्यात्मिक साधना को समर्पित कर दिया।

स्वामी परमानंद पुरी के बारे में बताया जाता है कि उनका संबंध कश्मीर के एक ब्राह्मण परिवार से था और उनके माता-पिता लंदन में रहते थे। उनके शिष्यों के अनुसार स्वामी की दिनचर्या अत्यंत अनुशासित थी। वह प्रतिदिन रात दो बजे उठते और तीन बजे तक नित्यकर्म पूरा करने के बाद सुबह आठ बजे तक ईश्वर का ध्यान करते थे।
शिष्यों के मुताबिक उन्होंने अपने जीवन में दो बार 28-28 वर्षों तक फलाहार किया। उन्हें कई विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी था। बताया जाता है कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
स्वामी परमानंद पुरी के निधन पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, दुग्ध संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा, पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी सहित मनोज शर्मा, लाखन सिंह नेगी, गोपाल सिंह बिष्ट, राकेश बृजवासी, पंकज खत्री, भुवन पनेरू, कैलाश पनेरू, महेश पाठक, पुष्कर सिंह मेहरा, भावना, महिपाल सिंह समेत अनेक लोगों ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने स्वामी के निधन को आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

