देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में ’’30 हेक्टेयर वन भूमि हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए हस्तांतरित करने को मंजूरी’’ दे दी गई।इसके साथ ही श्रमिकों, पशुपालकों, छात्रों और खेल क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसलों पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 15 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर फैसला लिया गया।
सबसे अहम फैसला नैनीताल हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने से जुड़ा है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के बेलबाबा क्षेत्र में उपलब्ध ’’30 हेक्टेयर भूमि हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए हस्तांतरित’’ की जाएगी।
श्रमिकों के लिए भी कैबिनेट ने बड़े फैसले लिए हैं। ’’उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026’’ को मंजूरी दी गई है। इसके तहत न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, हर महीने की सात तारीख तक वेतन और डिजिटल भुगतान जैसे प्रावधान लागू होंगे। सबसे खास बात’’समान काम के लिए महिला और पुरुषों को समान वेतन’’ मिलेगा। इसके अलावा ’’उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’’ को भी मंजूरी दी गई है। इसमें औद्योगिक विवादों के समयबद्ध समाधान, ट्रेड यूनियनों की मान्यता और शिकायत निवारण समितियों के गठन का प्रावधान है। श्रमिकों के लिए री-स्किलिंग फंड भी बनाया जाएगा। पशुपालकों के लिए भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। अब सामान्य वर्ग के पशुपालक भी राज्य की गो पालन योजना का लाभ ले सकेंगे। लाभार्थी ’’गाय के साथ भैंस खरीदने का विकल्प’’ भी चुन सकेंगे।
पशु की यूनिट कॉस्ट ’’40 हजार से बढ़ाकर 60 हजार रुपये’’ कर दी गई है। एससी-एसटी लाभार्थियों को 90 प्रतिशत और सामान्य वर्ग को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। सरकार के मुताबिक पहले साल करीब ’’2128 पशुपालकों’’ को इसका फायदा मिलेगा। एससी-एसटी के मेधावी छात्रों के छात्रावासों के संचालन के लिए नई नियमावली को मंजूरी दी गई है। वहीं हल्द्वानी के गौलापार स्थित ’’राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय’’ के संचालन के लिए 122 नियमित पदों समेत तकनीकी और सहायक पदों को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे को ’’मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार’’ देने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एमओयू करने को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा ईको टूरिज्म, जीएसटी, ग्रामीण पेयजल योजनाओं, वन विकास निगम और सहकारी समितियों से जुड़े प्रस्तावों को भी हरी झंडी मिली है।

