पंक्चर बनाना मुकेश, कराटे के दौरान मुकेश पाल

हल्द्वानीः साइकिल का पंक्चर बनाने वाला मुकेश है कराटे का बेहतर खिलाड़ी और कोच

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क्यूकुशिन कराटे में हासिल की ब्लैक बेल्ट सेकेंड डेन
आशीष पांडेय
हल्द्वानी। आमतौर पर छोटे-मोटे काम करने वाले को लोग कमतर ही समझते हैं, मगर जब उनसे बातचीत होती है तो उनके हुनर, प्रतिभा और क्षमता को देखकर लोगों की सोच ही बदल जाती है। हल्द्वानी के एक युवक के बारे में यह बात सटीक बैठती है। यह युवक आपको दिनभर हाइवे किनारे साइकिल के पंक्चर जोड़ते हुए मिल जाएगा लेकिन, सुबह-शाम वह एक शिक्षक की भूमिका में नजर आएगा। दरअसल इस युवक में कराटे खेल का शानदार हुनर है, जो सुबह-शाम लोगों को कराटे के दांव-पेच सिखाता है। इस युवक का नाम है मुकेश पाल।
साइकिल के पंक्चर बनाने वाले हल्द्वानी के मुकेश पाल ने एक और उपलब्धि अपने नाम की है। उन्होंने क्यूकुशिन कराटे में ब्लैक बेल्ट सेकेंड डेन हासिल किया है। कानपुर के शुक्लागंज में 3 से 7 जनवरी तक हुई प्रतियोगिता में उन्होंने यह बेल्ट पास की। वह उत्तराखंड में ब्लैक बेल्ट सेकेंड डेन पास गिने-चुने लोगों में शामिल हो गये हैं।
बरेली रोड, गौजाजाली निवासी मुकेश, कक्षा 5 से आगे पढ़ाई नहीं कर पाए। पढ़ने, लिखने और खेलने कूदने की उम्र में उनको चाय की दुकान में काम करना पड़ा। इसके बाद भाई के साथ आरा मशीन में काम किया।
मुकेश कहते हैं कि आरा मशीन में काम करने के दौरान एक बार हाथ कटने से बाल बाल बचा। इसके बाद यह काम करने में डर लगने लगा। फिर क्या था परिवार का हाथ बटाने के लिए साइकिल की दुकान में काम करने लगा।

पंक्चर बनाना मुकेश
पंक्चर बनाना मुकेश

2013 में हुई कराटे सीखने की शुरुआत
मुकेश दोस्तों के साथ वर्ष 2013 में कराटे सीखने लगे। फिर कराटे को नहीं छोड़ा। कई बार परिस्थितियां अनुकूल न होने पर इंस्टक्टर देवेन्द्र सिंह रावत ने हौसलाअफजाई की और ब्लैक बेल्ट होने पर खुद की एकेडमी खोलने की राह दिखाई।
क्यूकुशिन कराटे में ब्लैक बेल्ट फस्र्ट डेन पास करने में पांच साल लग जाते हैं। इसके बाद सेकेंड डेन के लिए तीन साल की प्रैक्टिस करनी पड़ती है। सेकेंड डेन के इग्जाम में बेसिक प्रैक्टिस के अलावा 30 फाइट खेलनी पड़ती हैं। इसके बाद रिटर्न इग्जाम भी होता है। इसमें इंग्लिश और जैपेनिज दोनों में सवाल पूछे जाते हैं। मुकेश का यह इग्जाम पास का सार्टिफिकेट मिल गया है, बेल्ट मिलनी बाकी है जो जापान से आती है। इसमें बकायदा खिलाड़ी का नाम भी लिखा होता है।

कराटे के दौरान मुकेश पाल
कराटे के दौरान मुकेश पाल

अब अगला लक्ष्य पढ़ाई का
कराटे मास्टर मुकेश का अब अगला लक्ष्य पढ़ाई का है। मुकेश दोस्तों की मदद से पढ़ाई को भी पूरा करना चाहते हैं। उनका मनना है कि सीखने और पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती है। हालांकि काम की व्यस्तता और कराटे से समय निकाल पाना कठिन काम जरूर है।

मुकेश अपनी कराटे एकेडमी में लड़कियों के लिए निशुल्क कैंप भी लगाने वाले हैं। यदि कोई इच्छुक हो तो 7500958202 में संपर्क कर सकता है।

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