हल्द्वानी। सोमवारी बाबा महाराज के अनन्य भक्त एवं संत परमानंद पुरी महाराज ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को समाधि ले ली। वे वर्तमान में हल्द्वानी के शीश महल इलाके में रह रहे थे। उनके निधन की खबर से उनके अनुयायियों और भक्तों में शोक की लहर है। परमानंद पुरी महाराज लंबे समय से हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में रहकर आध्यात्मिक जीवन व्यतीत कर रहे थे।
भक्तों के अनुसार परमानंद पुरी महाराज का जन्म वर्ष 1889 में कश्मीर में हुआ था। वर्ष 2021 में उनके 132वें जन्मोत्सव का आयोजन हल्द्वानी में किया गया था। उनके भक्त उन्हें दुनिया के सर्वाधिक बुजुर्ग संतों में से एक बताते रहे हैं।
बताया जाता है कि परमानंद पुरी महाराज ने वर्ष 1920 से 1931 तक आसाम के एक सरकारी अस्पताल में चिकित्सक के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 1932 में उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया। आध्यात्मिक जीवन के दौरान उन्होंने भारत सहित कनाडा, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे और अमेरिका समेत कई देशों की यात्रा भी की।
भक्तों के मुताबिक महाराज हिंदी और अंग्रेजी समेत करीब 12 भाषाओं के जानकार थे। लंबे समय तक उन्होंने धारी क्षेत्र स्थित श्री 1008 सोमवारी बाबा आश्रम में साधु के रूप में जीवन बिताया। बाद में वह पदमपुरी आश्रम से भी जुड़े रहे। देश-विदेश में उनके बड़ी संख्या में अनुयायी बताए जाते हैं।
परमानंद पुरी महाराज के समाधि लेने की सूचना के बाद उनके भक्तों और श्रद्धालुओं के बीच शोक का माहौल है। उनके अंतिम संस्कार/समाधि कार्यक्रम को लेकर भक्तों और अनुयायियों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद श्रद्धालुओं को इसकी सूचना दी जाएगी।

