yog trainer डिग्री कालेज के 116 योग प्रशिक्षकों के सामने एक बार फिर रोजगार का संकट

डिग्री कालेज के 116 योग प्रशिक्षकों के सामने एक बार फिर रोजगार का संकट

उत्तराखण्ड एजुकेशन/कोचिंग करियर जीवन मंत्र ताजा खबर देहरादून नैनीताल
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31 अगस्त 2026 को समाप्त हो जाएगी 11 महीने की सेवा
देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत 116 योग प्रशिक्षकों के सामने एक बार फिर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इन सभी योग प्रशिक्षकों की 11 महीने की सेवा 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन योग प्रशिक्षकों ने करीब एक साल तक महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को योग का प्रशिक्षण दिया, उनकी सेवा अब आगे जारी रहेगी या नहीं? और अगर नियुक्ति होगी भी, तो क्या फिर से आउटसोर्स के माध्यम से ही की जाएगी?

दरअसल, प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में योग प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्ष योग प्रशिक्षकों की तैनाती की गई थी। सितंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली की आउटसोर्स एजेंसी पाटलीपुत्र सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इन प्रशिक्षकों को नियुक्त किया गया। इनकी नियुक्ति अस्थायी रूप से 11 महीने के लिए की गई थी। प्रदेश के अलग-अलग राजकीय महाविद्यालयों में कुल 116 योग प्रशिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई। इन प्रशिक्षकों का काम महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं को योग का प्रशिक्षण देना, योग के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करना रहा। अब 11 महीने की निर्धारित अवधि पूरी होने जा रही है। उच्च शिक्षा निदेशालय के संयुक्त निदेशक प्रोफेसर एएस उनियाल की ओर से राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि योग प्रशिक्षकों की 11 महीने की सेवा 31 अगस्त 2026 को समाप्त करते हुए उन्हें कार्यमुक्त किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगस्त महीने तक का पूरा वेतन पहले ही जारी किया जा चुका है। यानी 31 अगस्त के बाद इन 116 योग प्रशिक्षकों की मौजूदा नियुक्ति समाप्त हो जाएगी। सेवा समाप्त होने की सूचना के बाद योग प्रशिक्षकों में नाराजगी भी है। योग शिक्षक संघ का कहना है कि प्रशिक्षित युवाओं को बार-बार अस्थायी और आउटसोर्स नियुक्तियों के भरोसे छोड़ना उनके भविष्य के साथ न्याय नहीं है। योग शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित नेगी ने सरकार से मांग की है कि योग प्रशिक्षकों के सुरक्षित भविष्य के लिए उनकी नियुक्ति विभागीय संविदा के आधार पर की जाए।

उनका कहना है कि “योग प्रशिक्षित बेरोजगारों के सामने एक बार फिर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। संगठन सरकार से मांग करता है कि योग प्रशिक्षकों के सुरक्षित भविष्य के लिए शीघ्र कोई ठोस कदम उठाया जाए और उन्हें विभागीय संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाए।” संगठन का कहना है कि योग आज केवल व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में महाविद्यालयों में योग प्रशिक्षकों की नियमित और स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। योग प्रशिक्षकों का कहना है कि अगर हर साल उनकी सेवा समाप्त कर नई प्रक्रिया के तहत नियुक्ति की जाती है, तो इससे न केवल प्रशिक्षकों के सामने रोजगार की अनिश्चितता बनी रहती है, बल्कि महाविद्यालयों में योग प्रशिक्षण की निरंतरता भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि नए शैक्षणिक सत्र में योग प्रशिक्षकों की तैनाती आउटसोर्स के माध्यम से अलग से की जाएगी। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा 116 योग प्रशिक्षकों को ही दोबारा मौका मिलेगा, या नई भर्ती प्रक्रिया के जरिए नए प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी? साथ ही योग शिक्षक संघ की विभागीय संविदा पर नियुक्ति की मांग पर सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर भी सभी की नजरें टिकी हैं।

एक तरफ प्रदेश में योग को बढ़ावा देने और युवाओं को योग से जोड़ने की बात लगातार की जा रही है, तो दूसरी तरफ योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति बार-बार अस्थायी आधार पर होने से उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 31 अगस्त को 116 योग प्रशिक्षकों की वर्तमान सेवा समाप्त होने के बाद सरकार की अगली व्यवस्था क्या होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल योग प्रशिक्षक सरकार से अपने सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें बार-बार आउटसोर्स नियुक्ति के बजाय विभागीय संविदा के आधार पर स्थायी व्यवस्था दी जाए, ताकि रोजगार की अनिश्चितता खत्म हो और महाविद्यालयों में योग प्रशिक्षण भी लगातार जारी रह सके।

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