
नाबार्ड के सहयोग से 90 महिलाओं को मिल रहा प्रशिक्षण
कुमाऊं जनसन्देश ब्यूरो
हल्द्वानी। महिलाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल की जा रही है। नाबार्ड के सहयोग से काठगोदाम से संचालित महिला एवं पिछड़ा वर्ग सहकारी समिति लिमिटेड को ’’कढ़ाई एवं सजावटी वस्त्र कला प्रशिक्षण परियोजना’’ मिली है। दो वर्ष की इस परियोजना के माध्यम से कुल 90 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। परियोजना के तहत महिलाओं को तीन समूहों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए रामनगर, दमुवाढूंगा-काठगोदाम और सूर्यागांव, भीमताल में प्रशिक्षण केंद्र निर्धारित किए गए हैं।
अब तक रामनगर और दमुवाढूंगा-काठगोदाम में 30-30 महिलाओं को 20-20 दिन का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने कढ़ाई एवं सजावटी वस्त्र कला की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल किया और अलग-अलग डिजाइन के साथ उपयोगी उत्पाद तैयार करना भी सीखा। वर्तमान में सूर्यागांव, भीमताल में 30 महिलाओं का प्रशिक्षण उत्साहपूर्वक चल रहा है। महिलाएं पूरे मनोयोग से इस कला की बारीकियां सीख रही हैं, ताकि भविष्य में यही हुनर उनके लिए आय और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन सके।

प्रशिक्षण के बाद मिलेगा कार्य का व्यावहारिक अनुभव
परियोजना के तहत तीनों समूहों का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी 90 महिलाओं को कढ़ाई एवं सजावटी वस्त्र कला से जुड़ी किसी कार्य इकाई का ’’शैक्षणिक भ्रमण’’ कराया जाएगा। इससे महिलाओं को वास्तविक कार्यस्थल पर काम करने की प्रक्रिया, उत्पादन और बाजार से जुड़ी जानकारी को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा। इसके बाद लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को दो दिन का ’’उन्नत प्रशिक्षण’’ भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य महिलाओं के हुनर को और निखारना तथा उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने के लिए सक्षम बनाना है।

बैंक ऋण से स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को अपना स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंक से ऋण दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा। इससे महिलाएं घर या छोटे स्तर पर कढ़ाई एवं सजावटी वस्त्र कला का काम शुरू कर अपनी आय बढ़ा सकेंगी। महिला एवं पिछड़ा वर्ग सहकारी समिति लिमिटेड का प्रयास है कि महिलाएं केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि अपने सीखे हुए हुनर को रोजगार में बदलकर आत्मनिर्भर बनें।
प्रशिक्षण, शैक्षणिक भ्रमण, उन्नत प्रशिक्षण और बैंक ऋण के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। नाबार्ड के सहयोग से चल रही यह पहल महिलाओं के लिए सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ’’हुनर से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता तक पहुंचने का सुनहरा अवसर’’ बन रही है।

