16 जुलाई को कालाढूंगी और हल्द्वानी विधानसभा में होंगे कार्यक्रम, पौधारोपण और हरेला परंपरा को बढ़ावा देने का आह्वान
हल्द्वानी। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक हरेला महापर्व के अवसर पर हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम की ओर से “हरेला प्रतियोगिता-2026” का आयोजन किया जाएगा। नगर निगम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को हरेला की परंपरा से जोड़ना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करना है।
प्रतियोगिता का आयोजन 16 जुलाई 2026 को दो चरणों में किया जाएगा। कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम सुबह 11 बजे आयोजित होगा, जिसकी संयोजक डॉ. छवि काण्डपाल (जिला पंचायत सदस्य) होंगी। वहीं हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में प्रतियोगिता अपराह्न 3 बजे आयोजित की जाएगी, जिसके संयोजक भुवन जोशी (भाजपा नेता) होंगे।
हरेला उत्तराखण्ड का प्रमुख लोकपर्व है, जिसे हरियाली, समृद्धि, खुशहाली और धन-धान्य का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व केवल अच्छी फसल की कामना का उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और मानव जीवन के अटूट संबंध का भी प्रतीक है। लोकमान्यता है कि “जिसका जितना बड़ा हरेला, उसकी उतनी अच्छी फसल।” इसी विश्वास के साथ प्रत्येक वर्ष घर-घर में हरेला बोया जाता है और परिवार व समाज की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
श्रावण मास में मनाए जाने वाले इस पर्व के दौरान घरों में पांच या सात प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। नौ दिनों तक उनकी देखभाल करने के बाद दसवें दिन पूजा-अर्चना कर हरेला काटा जाता है और देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्ग अपने परिजनों को हरेला लगाकर सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं।
नगर निगम की ओर से आयोजित हरेला प्रतियोगिता-2026 के माध्यम से नागरिकों से अधिक से अधिक पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया है।
उत्तराखण्ड सरकार ने भी हरेला पर्व के महत्व को देखते हुए इस अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि प्रदेशवासी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस लोकपर्व को मनाते हुए वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
महापौर कार्यालय की ओर से सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे हरेला महापर्व को जन-जन का उत्सव बनाते हुए प्रकृति संरक्षण, हरियाली संवर्धन और उत्तराखण्ड की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

