भाष्कर भौर्याल की पेंटिंग

बागेश्वर के इस युवा कलाकार की पेंटिंग देखेंगे तो आप भी कहेंगे ‘‘ये कौन चित्रकार है’’

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भाष्कर भौर्याल की चित्रकारी में छुपी होती है पहाड़ की संस्कृति, पलायन का दंश और महिलाओं का संघर्ष
कुमाऊं जनसंदेश डेस्क
हल्द्वानी। बागेश्वर के ग्राम कुरौली दुग नाकुरी के रहने वाले भाष्कर भौर्याल को अपनी संस्कृति से बेहद लगाव है। वे पहाड़ की संस्कृति, वास्तविक हालातों, महिलाओें के संघर्षभरे जीवन और चुनौतियों को चित्र के रूप में बहुत ही मार्मिक और सजीव तरह से ऐसे उकेरते हैं कि सबकुछ चित्रों के माध्यम से स्वतः ही स्पष्ट हो जाता है। भाष्कर भौर्याल अल्मोड़ा एसएसजे परिसर से बैचलर आफ फाइन आटर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। भाष्कर ने बताया कि उन्हें चित्रों की प्रेरणा पहाड़ों से और यहां के जनमानस और लोकसमाज से मिलती है।

भाष्कर भौर्याल
भाष्कर भौर्याल

 

इस युवा चित्रकार को मंच का इंतजार
हल्द्वानी। भाष्कर भौर्याल जब भी कैनवास पर ब्रश चलाते हैं तो लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर बना लेने के बाद ही चैन से बैठते हैं। उनके बनाए चित्र पलायन का दंश झेल रहे पहाड़ की दशा भी खुद बयां कर देते हैं। एक अच्छे, युवा और मंझे हुए चित्रकार को हालांकि अभी कोई मंच नहीं मिल पाया है। अपनी चित्रकारी का हुनर दिखाने के लिए उन्हें अच्छे मंच का इंतजार है। फिलहाल वे कुमाऊंनी संस्कृति पर आधारित चित्रांें की श्रृंखला बनाने में जुटे हुए हैं।
आप भी देखें भाष्कर भौर्याल की बनाई तमाम पेंटिंग्स

 

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