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टांडा जंगल: आपके प्यार की डोर, बंदरों को धकेल रही मौत की ओर

उत्तराखण्ड ऊधमसिंह नगर ताजा खबर

इनको है बंदरों की जान प्यारी, कर रहे टांडा जंगल में आम-अमरूद का बाग लगाने की तैयारी
हल्द्वानी/रुद्रपुर। आपके प्यार की डोर जाने अनजाने में बंदरों को मौत की ओर ले जा रही है। वहीं बंदर भी लालच में आकर जान गवां रहे है। मगर एक डाक्टर ने बेमौत मर रहे बंदरों की जान बचाने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। वे जल्द ही टांडा जंगल में आम और अमरूद के पौधे लगाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। फिलहाल करीब एक हजार फलदार पौधे लगाने की योजना बनाई गई है। यह बीड़ा वे खुद अपने खर्च पर उठाएंगे।

हल्द्वानी-रुद्रपुर मार्ग में स्थित टांडा जंगल
हल्द्वानी-रुद्रपुर मार्ग में स्थित टांडा जंगल

दरअसल हल्द्वानी-रुद्रपुर मार्ग में स्थित टांडा जंगल किसी जमाने में घना जंगल था और जंगली जानवर अपने खाने पीेने की तलाश जंगल के अंदर रहकर ही किया करते थे। मगर धीरे-धीरे जंगल कम होता रहा और जंगली जानवरों का सड़क किनारे आने का सिलसिला बढ़ता गया। खासकर बड़ी तादात में बंदर टांडा जंगल से गुजर रही सड़क किनारे देखे जा सकते हैं। वहीं इस मार्ग से आवाजाही करने वाले लोग भी जानवरों के प्रति प्यार जताने के लिए वाहन रोक कर उन्हें फल आदि खाने को देने लगे। पिछले कुछ वर्षो से यह क्रम काफी बढ़ चुका है। इस मार्ग से सफर करने के दौरान आप साफ देख सकते हैं कि कार सवार सड़क किनारे वाहन खड़ा करके बंदरों को केले व अन्य फल खिलाते नजर आ जाते हैं।
मगर जानवरों से प्यार जताकर उन्हें बीच सड़क में फल उपलब्ध कराने वाले लोग खुद नहीं जानते कि उनका प्यार ही बंदरों की जान पर भारी पड़ रहा है। क्योंकि बंदर हर आने वाले वाहन से कुछ खाने की उम्मीद लिये बीच सड़क में पहुंच जा रहे हैं और वाहन की चपेट में आकर अपनी जान गवां रहे हैं। आप हल्द्वानी- रुद्रपुर मार्ग में अक्सर वाहन से कुचले बंदरों को देख कर सहज की अनुमान लगा सके है। हर रोज औसतन एक न एक बंदर की वाहन से कुचलकर मौत हो ही जाती है।
बंदरों के असमय काल के गाल में समाने से हल्द्वानी निवासी पर्यावरण प्रेमी एवं रुद्रपुर आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डा. आशुतोष पंत बेहद आहत हैं।

पर्यावरण प्रेमी आशुतोष पंत
पर्यावरण प्रेमी आशुतोष पंत

डा. आशुतोष पंत टांडा जंगल में लगाएंगे फलदार पौधे
– डा. पंत ने बताया कि हर रोज खाने के लालच में आकर बंदर सड़क में कुचले दिख जाते हैं। अब बंदरों को क्या मालूम की हर वाहन सवार रोककर उन्हें खाने की सामग्री नहीं दे सकता। इसको देखते हुए टांडा जंगल में एक हजार आम और अमरूद के पौध लगाने का विचार किया है। जिससे कि उन्हें फल जंगल के अंदर ही मिल जाएं और वे सड़क में आकर बेमौत न मारे जाएंबताया कि इस सम्बंध में वन विभाग अधिकारियों से भी चर्चा की जा रही हैं उम्मीद है कि इस बरसात के मौसम में एक हजार फलदार पौधे टांडा जंगल में लगा दिये जाएंगे।
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