डिजायनर लहंगा पिछौडे़ में सजी नव युवती

इस डिजायनर कुमाऊंनी लहंगे पिछौड़े का जवाब नहीं फैशन के साथ संस्कृति को भी संजोये है किमाया

उत्तराखण्ड ताजा खबर नैनीताल
डिजायनर लहंगा पिछौडे़ में सजी नव युवती
डिजायनर लहंगा पिछौडे़ में सजी नव युवती

हल्द्वानी। कुमाऊंनी संस्कृति की पहचान ही निराली है। उस पर यहां की वेशभूषा का जवाब नहीं। पारंपरिक लहंगा पिछौड़ा महिलाओं व युवतियों को खासा लुभाता आया है। मगर काफी भारी और परंपरागत डिजायन होने के चलते नव युवतियां थोड़ा से इससे दूरी बनाने लगी थी। मगर इसे पहनने की उनकी चाहत फिर भी कम नहीं हुई है। संस्कृति के साथ फैशन भी बना रहे इसके लिए बाजार में डिजायनर लहंगा और पिछौड़ा उतार दिया गया है। इसका आकर्षक रंग और डिजायन नव युवतियों व महिलाओं को खासा लुभा रहा है।

यह डिजायन तैयार किया है नैनीताल रोड स्थित वॉक वे मॉल में किमाया नाम से डिजायनर कपड़ों के शोरूम का संचालन करने वाली भूमिका भंडारी अग्रवाल और हिमानी आनंद रावत ने। दोनों ही कपड़ों का डिजायन खुद ही तैयार कर अपने हुनर फैशन जगत में दिखा रही हैें। हिमानी आनंद रावत जहां फैशन डिजायनिंग का कोर्स कर शहर की युवतियों व महिलाओं के स्टाइल को देख डिजायन करती हैं। वहीं भूमिका भंडारी अग्रवाल परंपरा व स्टाइल के बेजोड़ तरीके से स्टाइलिश डिजायन तैयार कर अपनी कला के जादू से युवतियों व महिलाओं के फैशन व सजने संवरने में चार चांद लगा रही हैं। भूमिका समय- समय पर रैंप शो, एंकरिंग भी करती रहती हैं। संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखने के बाद भी कुछ करने की तमन्ना के चलते ही दोनों ही नवयुवतियों व महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही फैशनेबल और डिजायनर कपड़े मुहैया कराने में जुटी हुई हैं।

वॉक वे मॉल स्थित किमाया प्रतिष्ठान
वॉक वे मॉल स्थित किमाया प्रतिष्ठान
प्रतिष्ठान संचालिका हिमानी आनंद रावत व भूमिका भंडारी अग्रवाल
प्रतिष्ठान संचालिका हिमानी आनंद रावत व भूमिका भंडारी अग्रवाल

परंपरा के साथ स्टाइल

भूमिका व हिमानी ने बताया कि उनके प्रतिष्ठान में परंपरा के साथ स्टाइल का विशेष ख्याल रखा जाता है। ताकि संस्कृति के संरक्षण के साथ ही सजने संवरने में कमी कमी न रह सके। बताया कि किमाया में आकर्षक डिजायनर लहंगे पिछौड़े के साथ ही वेस्टर्न ड्रेस, इंडो वेस्टर्न ड्रेस की पूरी रेंज उपलब्ध है। साथ ही डिमांड आने पर नए डिजायन भी तैयार किये जाते हैं। बताया कि डिजायनर होने के चलते कुमाऊंनी लंहगा पिछोड़े की मांग फिर से बढ़ने लगी है।

किमाया नाम ही क्यूं
भूमिका अग्रवाल ने बताया कि लड़की के पूरे श्रंृगार को ही किमाया कहा जाता है। इसके अलावा गरुड़ क्षेत्र में किमाइनी देवी को पूजा जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से उन पर विशेष आस्था के चलते भी प्रतिष्ठान का नाम किमाया रखा गया है।

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