
हल्द्वानी। आरसेटी कुंवरपुर, नैनीताल में 22 दिसंबर 2025 से संचालित 31 दिवसीय टेलर–वूमेन गारमेंट्स (महिला वस्त्र निर्माण) प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला प्रशिक्षुओं द्वारा स्वयं निर्मित परिधानों की एक आकर्षक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शनी में नायरा कट, सरारा, अफगानी, जंप सूट, पटियाला सूट के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के ब्लाउज—सिंपल, प्लेन, कटोरी, प्रिंस—एवं सलवार, फ्रॉक, मैक्सी, पेंट-कमीज जैसे परिधानों को प्रदर्शित किया गया। महिला प्रशिक्षुओं की सृजनात्मकता और तकनीकी दक्षता की झलक इन वस्त्रों में स्पष्ट दिखाई दी।

प्रदर्शनी का अवलोकन नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) श्री मुकेश बेलवाल ने किया। उन्होंने कहा कि सिलाई एक ऐसी कला है जिसमें महिलाओं की स्वाभाविक रुचि होती है, किंतु रोजगार के रूप में पुरुषों की भागीदारी अधिक देखी जाती है। यदि महिलाएं इस प्रशिक्षण के दौरान सिखाए गए उद्यमिता विकास के गुणों के साथ अपने सिलाई कौशल को अपनाएं, तो वे स्वरोजगार के क्षेत्र में सशक्त उपस्थिति दर्ज कर सकती हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनेंगी।
इस अवसर पर बड़ौदा आरसेटी के निदेशक अतुल कुमार पाण्डेय, मास्टर ट्रेनर तारा देवी, प्रशिक्षक नरेंद्र सिंह पिलख्वाल एवं एफएलसी काउंसलर सुरेश बिष्ट उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने प्रशिक्षुओं के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

