नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में विज़िटिंग प्रोफेसर निदेशालय एवं भौतिक शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “वन नेशन, वन इलेक्शन: पालिसी फिजिबिलिटी इन लाइट ऑफ गवर्नमेंट्स रीसेंट रेकमेंडेशन्स” विषय पर शैक्षिक वेबिनार का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में भौतिक शिक्षा विभाग के नोडल हेड डॉ. संतोष कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि प्रो. नीता बोरा ने विषय की प्रासंगिकता और संभावित प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त किए।
वेबिनार के मुख्य वक्ता वरिष्ठ प्रोफेसर एम. एम. सेमवाल (राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं समन्वयक, डॉ. अम्बेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय) ने “एक राष्ट्र–एक चुनाव” की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, व्यवहारिक चुनौतियों और इसके लाभों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 1967 तक देश में समानांतर चुनाव सामान्य प्रथा थे, लेकिन बाद की परिस्थितियों में यह क्रम टूट गया।
प्रो. सेमवाल ने कहा कि एकसाथ चुनाव से संसाधनों की बचत, प्रशासनिक दक्षता, नीतिगत निरंतरता और मतदान प्रतिशत में वृद्धि की संभावना है। बार-बार चुनाव होने से सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था प्रभावित होती है तथा लोकलुभावन नीतियों का दबाव बढ़ता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे देश में एकसाथ चुनाव कराने के लिए लगभग 30 लाख EVM और VVPAT की आवश्यकता होगी, जिसके लिए बड़े स्तर पर संसाधन और लॉजिस्टिक तैयारियां अनिवार्य हैं।
उन्होंने अनुच्छेद 83, 85, 172, 174 और 356 सहित कई संवैधानिक बिंदुओं पर संशोधन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि संघीय ढांचे और व्यवहारिक चुनौतियों के समाधान के बिना इस व्यवस्था को लागू करना कठिन होगा।
वेबिनार में 100 से अधिक प्रतिभागियों—जिनमें प्रोफेसर, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल थे—ने प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का संचलन विज़िटिंग प्रोफेसर निदेशालय के निदेशक प्रो. ललित तिवारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ वेबिनार का समापन किया गया।प्रतिभागियों ने इस वेबिनार को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं नीति-निर्माण की दृष्टि से उपयोगी बताया।

