IMG 20251117 WA0006 प्रेस दिवस संगोष्ठी में गूंजा संदेश, जनसरोकारों से जुड़ना समय की मांग

प्रेस दिवस संगोष्ठी में गूंजा संदेश, जनसरोकारों से जुड़ना समय की मांग

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शहर के वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय सहारा के कुमाऊँ ब्यूरो प्रमुख गणेश पाठक को किया सम्मानित 

हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा द्वारा सोमवार को भारतीय प्रेस दिवस पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दिलीप चौबे रहे, जबकि शहर के वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय सहारा के कुमाऊँ ब्यूरो प्रमुख गणेश पाठक को सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. दिलीप चौबे ने कहा कि प्रिंट मीडिया का इतिहास 16वीं सदी से शुरू होता है और भारत में पत्रकारिता की जड़ें आजादी की लड़ाई में रहती हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की तेज़ प्रगति ने मीडिया का संपूर्ण परिदृश्य बदल दिया है। टेलीविजन, सैकड़ों चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स ने प्रिंट मीडिया की चुनौतियां बढ़ाई हैं।

चौबे ने कहा, “अखबार अब कारपोरेट कर्म हो गए हैं, इसलिए जनहित और विज्ञापनदाताओं के हितों में असंतुलन बढ़ा है। प्रिंट पत्रकारों की जिम्मेदारियां अधिक हैं और उन्हें विवेक, ईमानदारी तथा संतुलन के साथ काम करना होगा।”

विवि के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि तकनीक के दौर में अभिव्यक्ति कौशल और जनसरोकार दोनों को बचाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खबरों की दूरी कम हो गई है और प्रिंट मीडिया के लिए प्रतिस्पर्धा भारी हो चुकी है।

संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता दैनिक जागरण के संपादक विजय यादव ने कहा कि प्रिंट मीडिया एक दस्तावेज की तरह है जहां प्रत्येक बात सहेजी रहती है।उन्होंने कहा, “अखबारों का जनसरोकारों से जुड़ना बहुत जरूरी है। खबरें देने में देर हो सकती है, लेकिन बिना परखे खबरें न दें—यही प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता की पहचान है।”

उन्होंने भाषाई शुद्धता को पत्रकार की सर्वोच्च दक्षता बताया।

सम्मानित पत्रकार गणेश पाठक ने वर्तमान मीडिया परिदृश्य की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज हर तीसरा व्यक्ति खुद को पत्रकार बताने लगा है, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।उन्होंने कहा, “जनसरोकारों की पत्रकारिता तिरोहित हो गई है, स्तुतिगान की पत्रकारिता बढ़ रही है। समाज, राष्ट्र और मनुष्यता के हित में सच लिखना ही सच्ची पत्रकारिता है।”

कार्यक्रम की शुरुआत पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा के निदेशक प्रो. राकेश चन्द्र रयाल ने भारतीय प्रेस दिवस के इतिहास पर विस्तृत विवेचन के साथ की।

इस मौके पर शहर के अनेक वरिष्ठ पत्रकार ओ.पी. पाण्डेय, जगमोहन रौतेला, दया जोशी, चन्द्रशेखर जोशी, विपिन चन्द्रा, नवीन चन्द्र पाठक, नीमा पाठक, गणेश जोशी, भूपेन्द्र सिंह सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। संचालन डॉ. राजेन्द्र क्वीरा ने किया।संगोष्ठी के साथ ही पत्रकारिता के चतुर्थ सेमेस्टर के शिक्षार्थियों की कार्यशाला का समापन भी हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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