भीमताल।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सम्पन्न होने के बाद भी प्रदेश में पंचायतों के रिक्त पदों को अब तक न भरे जाने पर कांग्रेस नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भीमताल विधानसभा क्षेत्र से वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज शर्मा और कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नैनीताल भुवन सिंह दर्मवाल ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा कि पंचायतों के गठन में हो रही देरी से यह स्पष्ट होता है कि सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति गंभीर नहीं है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज शर्मा ने कहा कि “एक देश–एक चुनाव” का नारा देने वाली मोदी सरकार प्रदेश की ग्राम पंचायतों के रिक्त पद तक नहीं भर पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधिकांश ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हो पाया है, जिससे पंचायत व्यवस्था लगभग ठप पड़ी हुई है। पंचायतों के अधूरे गठन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य रुक गए हैं और जनता छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी परेशान हो रही है।
उन्होंने कहा कि “जनप्रतिनिधि का मतलब जनता की समस्याओं से होता है, परंतु सरकार की गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली के कारण चुने हुए प्रधान भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।”
शर्मा ने सवाल उठाया कि जब पंचायतों का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, तो जिनका गठन अब होगा, उनके कार्यकाल की समानता पहले बनी पंचायतों से कैसे सुनिश्चित की जाएगी? क्या कुछ जनप्रतिनिधियों को केवल चार या साढ़े चार साल का ही कार्यकाल मिलेगा? उन्होंने सरकार से मांग की कि तत्काल पंचायतों के सभी रिक्त पदों को भरा जाए और जनता को संवैधानिक असमंजस में न डाला जाए।
शर्मा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “यह अजब-गजब व्यवस्था केवल भाजपा शासन में ही देखने को मिलती है। लगता है या तो सरकार को संविधान का ज्ञान नहीं है या फिर संवैधानिक व्यवस्था का मज़ाक बनाना उसका शौक बन गया है।”
वहीं कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष भुवन सिंह दर्मवाल ने कहा कि भाजपा सरकारें लगातार “बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर” द्वारा बनाए गए संविधान को कमजोर करने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में “सरकार के संरक्षण में गुंडागर्दी के दम पर लोकतंत्र को हाईजैक किया गया”, जो संवैधानिक मूल्यों पर सीधा प्रहार था।
दर्मवाल ने कहा कि पंचायतों के रिक्त पदों को न भरना लोकतंत्र की जड़ों पर चोट है। जनता छोटे-छोटे कामों के लिए भटक रही है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों का मनोबल टूट रहा है और सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “यह कैसी परंपरा बना दी गई है कि हर मुद्दे पर जनता को सड़कों पर उतरना पड़ता है, आंदोलन करना पड़ता है, तब जाकर सरकार जागती है। देश और प्रदेश जुमलों से नहीं, दूरदर्शी विजन से चलते हैं और इस सरकार के पास विजन है ही नहीं।”
दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मांग की कि राज्य सरकार तत्काल पंचायती निकायों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करे और ग्रामीण जनता को राहत प्रदान करे।
