सखी वन स्टाप सेंटर में काउंसिलिंग का नजारा

जब लौट आई प्रभा की खुशियां

उत्तराखण्ड समाज साहित्य

विनोद पनेरू
-हेलो, हां मैडम, हां मैं खुश हूं अब। वे अब मेरा पूरा ख्याल रखते हैं और उन्होंने उस महिला से सम्बंध तोड़ दिये हैं और परिवार की खुशियों के लिए हर कांेशिश कर रहे हैं। यह सुनकर कविता और ममता को अंदर से बहुत खुशी हुई और उन्होंने प्रभा से कहा कि अगर आगे कोई भी दिक्कत हो तो फोन कर देना। उसने भी जी मैडम कहकर फोन रख दिया।
-बात आठ मार्च की रही होगी। कार्यालय खुल चुका था और सेंटर की एडमिनिस्ट्रेटर कविता और काउंसलर ममता अपने कक्षों में बैठ चुकी थी। तभी 27 साल की प्रभा ने दफ्तर में प्रवेश किया। उसकी आंखों में आंसू और दर्द साफ झलक रहा थी। मैडम, मेरी जिंदगी की सब खुशियां छीन चुकी हैं और हर रोज अपमान और मार खाना दिनचर्या बन गया है। मुझे न्याय दिला दो। अब इतना दुख सहा नहीं जाता।
अरे बैठो पहले आराम से, कविता ने कहा और प्रभा को पीने को पानी दिया। पानी पीने के बाद प्रभा ने जो कुछ बताया उससे कविता और ममता भी सन्न रह गए।
27 साल की प्रभा की शादी नौ साल पहले अनिल से हुई। एक साल कब हंसी खुशी से कटा पता ही नहीं चला। प्रभा की खुशियों के रंग तब हवा में उड़ गए जब पता चला कि अनिल का पड़़ोस में रहने वाली रंजना से चक्कर चल रहा है। यह भी पता चला कि सिर्फ चक्कर ही नहीं बल्कि दोनों के बीच सब कुछ नाजायज भी हो रहा।
अनिल शादीशुदा होकर भी यह सब ठीक है क्या। मुझमें क्या कमी है। प्रभा का इतना कहना कि अनिल ने दो झापड़ जड़ दिये। बोला, तू इतनी सुंदर कहां। तुझ में वो बात कहां जो रंजना में है। प्लीज ऐसा मत कहो, मैं अपनी तरह से तो कोई कमी नहीं रखती। पर अनिल रंजना के प्यार में पागल कहां मानने वाला था। वहीं प्रभा अपनी उजड़ती दुनिया देख घुट-घुट के जीने पर विवश होने लगी। फिर उसने अनिल को समझाने की कांेशिश की तो जमकर पिटाई लगा दी। गर्भवती होने के बाद भी उसकी परवाह करने के बजाए रंजना से नजदीकी बढ़ती गई। बहू की पीड़ा जानने के बाद भी सास ससुर कुछ नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि वे खुद अनिल की हरकतों से आजिज आ चुके थे।
पराई औरत से सम्ंबंध और अपनी अनदेखी से प्रभा तिल-तिल मरने को विवश हो रही थी। जब फिर विरोध किया तो अनिल ने उसकी जमकर पिटाई कर घर से निकाल दिया। अब उसके पास कोई सहारा नहीं था। जब उसे पता चला कि सखी वन स्टाप सेंटर में दुखयारी महिलाओं को न्याय दिलाया जाता है तो वह भी पहुंच गई सेंटर।
मैडम मेरी दो बेटियां हैं और फिर पेट से हूं। पर मेरा पति मुझे आए दिन मारता रहता है और पराई औरत से भी सम्ंबंध रखता है। 27 साल की प्रभा के मुंह से यह सब सुन केंद्र की प्रशासक कविता और काउंसलर ममता ने उसे धीरज बंधाया और र्बैठने को कहा।
दूसरे दिन ही कविता और ममता प्रभा के घर पहुंचे और उसके घरवालों से बात की। वहीं अनिल को भी प्रभा के साथ सेंटर पहुंचनंे को कह दिया। नहीं आने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देकर वे चले आए। वहीं अनिल की अक्ल भी अब ठिकाने आने लगी थी।
अगले रोज, अनिल और प्रभा परिवार सहित कविता और ममता के सामने बैठ चुंके थे। कविता और ममता ने अनिल को समझाया, देखो, अनिल तुम यह गलत कर रहे हो। अगर अब भी परिवार की जिम्मेदारी नहीं ली, प्रभा की देखरेख नहीं की तो घरेलू हिंसा के केस में जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी। जेल का नाम सुनकर ही अनिल कांपने लगा और बोला, मैडम अब तक किये पर पछतावा है, पर विश्वास दिलाता हूं कि अब से ऐसा कोई काम नहीं करुंगा की प्रभा को शिकायत का मौका मिले। कहा कि वह बहक गया था पर अब प्रभा और पूरे परिवार का ख्याल रखेगा। समझा बुझा कर प्रभा व अनिल को को जाने को कह दिया गया।
दो दिन बाद कविता ने प्रभा को फोन मिलाया। हां मैडम आपका शुक्रिया गलती का अहसास होने पर वे बदल गए हैं और शराब तो छोड़ ही दी और पूरा समय परिवार को देते हैं। यह सुनकर कविता और ममता ने भी राहत की सांस ली कि चलो देर से ही सही उनकी बातों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाने से प्रभा की गृहस्थी की खुशियां लौट आई हैं।

नोट- घरेलू हिंसा की शिकार महिला को न्याय दिलाने के लिए फाजलपुर महरौला, रुद्रपुर में सखी वन स्टाप सेंटर खोला गया है। इसका मकसद महिलाओं को शोषण से बचाना, काउंसिंलिंग कर परिवारों को टूटने से बचाना है। पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए केस वर्कर सीमा गुणवंत, शिखा सरकार विश्वास में लेकर उनकी पीड़ा सुनती समझती हैं और फिर पूरी टीम पीड़िता को न्याय दिलाने में जुट जाते हैं।

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