नाव के जरिए झील का निरीक्षण करते डीएम व वैज्ञानिक

सरिताताल को संवारा, अब नैनी झील को नया जीवन देने में जुटे बंसल

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डीएम बंसल के विशेष प्रयासों पर इसरो के वैज्ञानिक झील का कर रहे तकनीकी निरीक्षण
कुमाऊं जनसंदेश डेस्क
नैनीताल। सरोवरनगरी के करीब स्थित सरिताताल झील की हालत अगस्त माह तक किस कदर खस्ता थी और उसके बाद उसकी रंगत में किस कदर निखार आ चुका है, इसे क्षेत्र के ग्रामीणों के अलावा पर्यटक भी बखूबी देख और महसूस कर चुके हैं। बदहाली के बाद सरिताताल को नया यौवन देने का काम नैनीताल के जिलाधिकारी सविन बंसल ने किया है। इसमें सिंचाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की भी मेहनत है। अब डीएम बंसल नैनीझील को नया जीवन देने के लिए विशेष प्रयास में जुट गए हैं। नैनी झील अधिक खूबसूरत नजर आए, झील की गहराई बरकरार रहे और यह एकदम साफ रहे, इस उददेश्य से डीएम सविन बंसल के विशेष प्रयासों पर इसरो के वैज्ञानिक नैनीझील का तकनीकी अध्ययन कर रहे हैं। इसके लिए आधुनिक यंत्रों का भी सहारा लिया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए इसरो के वैज्ञानिक कोई शुल्क भी नहीं ले रहे हैं।

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नाव से किया झील का निरीक्षण, जांच पड़ताल भी की
जिलाधिकारी सविन बंसल ने रविवार की दोपहर वैज्ञानिकों के साथ नैनी झील में भ्रमण कर वैज्ञानिकों द्वारा नैनी झील में किए जा रहे तकनीकि कार्यों का मौका मुआयना किया और वैज्ञानिकों से बात भी की। वैज्ञानिकों ने झील में भ्रमण कर सोनार सिस्टम के माध्यम से नैनी झील की गहराई की लगातार जीपीएस मानचित्रण किया गया। इस सर्वे में वैज्ञानिकों ने झील में मौजूद विघटित ठौस जैसे-ठौस अपशिष्ट, पीएच मान आदि का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों को झील के कई हिस्सों में गन्दगी होने का संकेत मिला। झील के कई हिस्सों में गहराई ज्यादा व कई हिस्सों में कम पाई गई। इसके साथ ही झील के पानी की गुणवत्ता, अवसादन तथा सूचकांक का भी अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। बंसल ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिक बैथीमेट्री सर्वे कर, प्रशासन को झील के सम्बन्ध में रिपोर्ट आख्या प्रस्तुत करेंगे जिसे शासन को भेजा जाएगा तथा झील के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु धनरशि अवमुक्त कराने के लिए अनुश्रवण भी किया जाएगा।

नैनी झील की औसत गहराई कम होना चिन्ता का विषय
नैनीताल। जिलाधिकारी बंसल ने बताया कि पाषाण देवी मन्दिर के समीप से मध्य तक क्षेत्रफल में झील की गहराई सर्वाधिक है। नैनी झील की औसत गहराई कम होना चिन्ता का विषय है। उन्होंने बताया कि अभी तक झील की विधिवत तकीनीकि मैपिंग न होने के कारण यह जानकारी नहीं है कि झील में कितना मलबा जमा है। उन्होंने बताया कि प्रोपर मैपिंग होने से यह जानकारी रहेगी किए झील में कितना मलबा समा रहा है। उसी के हिसाब से तकनीकी कार्यवाही भी की जायेगी। उन्होंने कहा कि नैनी झील को रिचार्ज करने वाले नालों की सफाई के साथ ही जाली लगाने का काम किया गया है। इसके साथ ही सूखाताल झील के पानी से बरसात में नैनी झील रिचार्ज होती है, के लिए विशेष कार्य योजना बनाई गई है। निरीक्षण के दौरान इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक वैभव गर्ग, वैज्ञानिक पंकज, इंजीनियर नमन, अभिषेक, ईशान, उप जिलाधिकारी विनोद कुमार, पुलिस उपाधीक्षक विजय थापा आदि मौजूद थे।

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