chmpa kothari

मेरा पहाड़ के लागी गै नजर, छोड़ि बे ए गई सबै भाबर

मन की बात मेरी कलम से समाज

मेरा पहाड़ के लागी गै नजर
चम्पा कोठारी

    मेरा पहाड़ के लागी गै नजर
छोड़ि बे ए गई सबै भाबर
दूसरी कुड़ि में किराई दीनी
बिजली, पाणी राशन मोल लीनी
बांज पड़ गइ नौला गध्यार
छोड़ि के ए गई सबै भाबर
मेरा पहाड़ के लागी गै नजर
गौ में कतु मेल मिलाप हुंछी
सुख दुख में सब एक है रुंछी
यां नी पछाड़न एक दूसार
छोड़ि बे ए गई सबै भाबर
मेरा पहाड़ के लागी गै नजर
कतुक लागछि म्याल कौतिक
संज्यात पूजा की हुंछी रौनक
साल में एक बार जाओ अपुण घर
साल में एक बार जाओ आपुण घर
छोड़ि बे ए गई सबै भाबर
मेरा पहाड़ के लागी गै नजर
पहाड़ नेता तुम का हरे गोछा
घर छोड़ि बेर हल्द्वाणि बसि रौछा
सदबुद्धि दिया हो इष्ट पितर
छोड़ि बे ए गई सबै भाबर
मेरा पहाड़ के लागी गै नजर।

– चम्पा कोठारी, बाल विकास अधिकारी, हल्द्वानी।

2 thoughts on “मेरा पहाड़ के लागी गै नजर, छोड़ि बे ए गई सबै भाबर

  1. एक दुर्भाग्य, जो मैदानों के छद्म सुख के वशीभूत हम लोगो ने अपरिवर्तनीय बना दिया है।

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