हल्द्वानी। द्वितीय अपर सिविल जज (जू.डि.)/न्यायिक मजिस्ट्रेट हल्द्वानी विशाल ठाकुर की अदालत ने सरकारी धन के गबन से जुड़े एक गंभीर मामले में थाना मुखानी को एफआईआर दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं। मामला प्रकीर्ण फौजदारी वाद संख्या 507/2025 महेन्द्र सिंह बिष्ट बनाम उपेन्द्र सिंह व अन्य से संबंधित है। अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार प्रार्थी महेन्द्र सिंह बिष्ट वर्ष 2025 में प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक कार्यालय, पूर्वी हल्द्वानी में बाह्य सेवायोजक के माध्यम से कार्यरत था। आरोप है कि इस दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा उस पर स्थानीय बाजार से रिफ्रेशमेंट व अन्य मदों के फर्जी बिल लाने का दबाव बनाया गया, जिसे प्रार्थी ने अस्वीकार कर दिया। मामले में वन निगम डीएलएम पूर्वी उपेन्द्र सिंह, असिस्टेंट अकाउंटेंट नितिन मुकेश, और लिपिक वैभव शुक्ला आरोपी हैं।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि इसके बाद आरोपियों ने स्वयं ‘नेगी स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट’ के नाम से कूटरचित व फर्जी बिल तैयार कर उन्हें पास किया और सरकारी धन का गबन किया। जांच में यह भी सामने आया कि कालाढूंगी रोड, हल्द्वानी में उक्त नाम से कोई प्रतिष्ठान अस्तित्व में नहीं है। इस संबंध में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन, नैनीताल द्वारा जारी पत्र को भी अदालत में प्रस्तुत किया गया। प्रार्थी का आरोप है कि फर्जीवाड़े की शिकायत करने पर उसे नौकरी से निकालने की धमकी भी दी गई। उसने 28 अक्टूबर 2025 को थाना मुखानी और बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों व तथ्यों के आधार पर माना कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने थाना मुखानी को निर्देश दिए हैं कि वह संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करे। आदेश की प्रति संबंधित थानाध्यक्ष को भेज दी गई है।

