निरीक्षण करते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट

तो ज्योलीकोट में वैली पुल के स्थान पर बन सकता है फिर नया पुल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दिये संकेत

उत्तराखण्ड ताजा खबर नैनीताल

नैनीताल। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग हाइवे में वीरभटटी (ज्योलीकोट) में 101 साल के ऐतिहासिक पुल के ध्वस्त हो जाने के बाद हाल ही में करोड़ों की लागत से वैली पुल तैयार किया गया है। मगर अधिक भार पड़ने के कारण एक ही दिन में पुल के पैनल टेड़े हो गए थे और कई बार आवागमन प्रभावित रहा। हालांकि अब पुल सुचारू है मगर इस के स्थान पर नया पुल भी बनाया जा सकता है। ऐसे संकेत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट ने दिये हैं। सूत्रों के अनुसार नए सिरे से पुल निर्माण के लिए वे केंद्रीय स्तर के नेताओं से भी पैरवी करने वाले हैं। वर्तमान में वैली पुल की भार क्षममता 16. 50 टन है जो भारी वाहनों के एक साथ गुजरने के लिए पर्याप्त नहीं है।

कुछ दिन पहले बना वैली पुल
कुछ दिन पहले बना वैली पुल

बता दें कि ज्योलीकोट- कर्णप्रयाग हाइवे मेें वीरभटटी के पास 101 साल पुराना पुल बना था। 25 सितंबर 2017 को गैस वाहन में आग लगने व सिलेंडरों के धमाकों की वजह से पुल क्षतिग्रस्त हो गया था और अक्टूबर माह में पुल पूरी तरह जवाब दे गया था। इसके बाद दिसंबर पहले सप्ताह में करोड़ों की लागत से 48 मीटर वैली पुल तैयार कराया गया। मगर वाहनों का एक साथ अधिक भार पड़ने से यह एक ही दिन में टेड़ा हो गया था और वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा। इसके बाद कई बार यातायात खोलने व बंद करने के बाद ंिफलहाल तो पुल को सभी वाहनों के लिए खोला गया है। लेकिन नेशनल हाइवे अधिकारियों के अनुसार पुल की भार सहन करने की क्षमता 16. 50 टन ही है। ऐसे में कई भारी वाहनों के एक साथ गुजरने से पुल पर अधिक लोड पड़ सकता है। अब हाइवे होने के कारण भारी वाहनों का आना जाना लगा रहता है। इधर सूत्रों के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भटट ने वीरभटटी पुल का निरीक्षण किया है और भार क्षमता 16. 50 टन ही होने के आधार पर इसका नए सिरे से निर्माण के संकेत दिये हैं। सूत्रों के अनुसार अजय भटट ने ऐतिहासिक पुल के क्षतिग्रस्त होने पर दुख जताते हुए एक बड़ी क्षति बताया। साथ ही

पुराना पुल
पुराना पुल

उन्होंने कहा कि वैली पुल इस मार्ग पर चलने वाले भारी भरकम वाहनों का वजन नहीं झेल सकता है। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से भी नया पुल बनाया जाना जरूरी है। बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है और वे नया पुल बनवाने के लिए उच्च स्तरीय अफसरों के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व से भी चर्चा कर पैरवी करेंगे। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में वैली पुल के स्थान पर नया पुल भी बनाया जा सकता है। हालांकि अधिक भार क्षमता का पुल बनने से भारी भरकम वाहनों की आवाजाही तो आसानी से हो सकेगी, मगर दुबारा पुल बनने से सरकार पर ही खर्च का बोझ पड़ेगा।

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