तब तो फायदेमंद है जीएसटी

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गुणवत्तायुक्त वस्तुएं मिलेंगी सस्ते में
वस्तुएं सस्ती होंगी और गुणवत्ता में भी सुधार
वस्तु एवं सेवा कर मतलब गुडस एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जीएसटी से आमजन व व्यापारियों को क्या नुकसान व क्या फायदा है। जीएसटी की जरूरत सहित विभिन्न शंकाओं व जिज्ञासा भरे सवालों के जवाब के लिए अधिवक्ता कामशिल टैक्स, वैट, इनकम टैक्स, एक्साइज व सर्विस टैक्स के जानकार रुद्रपुर निवासी भूपेष सी दुम्का ने साप्ताहिक समाचार पत्र कुमाऊं जन संदेष से विस्तार से जानकारी साझा की-

विनोद पनेरू, रुद्रपुर। इन दिनों चर्चा में चल रहे जीएसटी को लेकर व्यापारियों व आमजन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मगर विशेषज्ञों के अनुसार जीएसटी यानी वस्तु एवं उत्पाद कर के प्रभावी होने से वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। लोगों को बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद मिलने लगेंगे। साथ ही स्थानीय व्यापारियों को भी नुकसान के बजाय फायदा ही होगा। क्योंकि पूरे देश में किसी वस्तु विशेष के एक समान दाम होने से लोग भी सस्ते के चक्कर में बाहर खरीददारी करने नहीं जाएंगे। इससे तय है कि स्थानीय व्यापारियों का कारोबार बढ़ेेगा। बस इससे उन व्यापारियों को मुश्किलें होनी तय हैं जो अब तक नियमानुसार व्यापार नहीं कर रहे हैं।

क्यू पड़ी जीएसटी की जरूरत
अधिवक्ता भूपेश सी दुम्का के अनुसार वर्तमान में पूरी दुनिया एक बाजार बन गई है। विकसित देशों में पहले से ही जीएसटी यानी वस्तु एवं उत्पाद कर लागू है। मगर अपने देश में यह व्यवस्था लागू नहीं थी। इससे बाहर देशों से व्यापार करने वाले व्यापारी अगल-अलग कर चुकाने की जटिल प्रक्रिया से परेशान रहते थे। इसके अलावा राज्यवार अलग टैक्स था। जीएसटी के लागू होने से एक देश एक कर की व्यवस्था लागू हो सकेगी। बस अलग-अलग स्थानों के यातायात खर्च के अनुसार दाम में आंशिक अंतर आना स्वाभाविक है।

वस्तुएं सस्ती व गुणवत्ता होगी बेहतर
-अधिवक्ता दुम्का के अनुसार वर्तमान में किसी भी उत्पाद के तैयार होने से लेकर बिक्री तक करीब 30 से 35 प्रतिशत तक टैक्स चुकाना पड़ता है। इनमें एक्साइज,वैट व कस्टम शुल्क आदि शामिल हैं। लेकिन जीएसटी लागू होने से वस्तुओं में अधिकतम टैक्स सीमा 28 प्रतिशत तय कर दी गई है। इससे वस्तुओं के दामांें में कमी आएगी। हालांकि विलासिता की वस्तुओं के दामों में बढ़ोत्तरी हो जाएगी लेकिन रोजमर्रा के घरेलू जरूरत की वस्तुओं के दामों मंेे स्थिरता रहेगी।

व्यापारियों को नहीं है नुकसान
अधिवक्ता दुम्का के अनुसार जीएसटी आम आदमी से लेकर व्यापारी सभी के लिए हितकारी है। बस दिक्कत उन व्यापारियों को हो सकती है जो अब तक नियमानुसार कारोबार नहीं कर रहे हैं। अब व्यापार करने के लिए जीएसटी में पंजीकरण आवश्यक होगा। इससे कर चोरी में भी रोक लगेगी। इससे सरकार को भी राजस्व का फायदा होगा।
कपड़ा व्यापारी क्यूं हैं परेशान
अधिवक्ता भूपेश दुम्का के अनुसार रेडीमेड कपड़ों को छोड़कर थान वाले कपड़ों में अब तक टैक्स नहीं देना पड़ता था लेकिन जीएसटी के प्रभावी होने से थान कपड़ा कारोबारी भी कर के दायरे में आ जाएंगे। उन्हें भी रेडीमेड कपड़ा कारोबारियों की तरह पांच प्रतिशत कर देना ही होगा।

किसमें कितना लगेगा टैक्स
– अधिवक्ता दुम्का के अनुसार जीएसटी के लागू होने के बाद भी बिना पैंकिंग वाली खानान की वस्तुओं आटा, चावल, दाल, सब्जी में कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि पैंकिगं वाली खाद्य सामग्री में पांच प्रतिशत टैक्स देना होगा। अगरबत्ती में पहले कोई टैक्स नहीं लगता था मगर अब पांच प्रतिशत कर लगेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा को टैक्स फ्री रखा गया है। बताया कि ड्राई फू्रटस में 12 प्रतिशत, कपड़े में पांच, जूते-चप्पल में पांच, साबुन सर्फ में 18, बटर, चीज में 12 व स्टेशनरी में पांच से लेकर 18 प्रतिशत तक का टैक्स लगाया जाएगा।

क्या है इनकी निजी राय
अधिवक्ता दुम्का ने बताया कि सिंगापुर सहित अन्य देशोें में हर उत्पाद पर सात प्रतिशत की दर से ही जीएसटी लागू है। लेकिन अपने देश में पांच से लेकर 28 प्रतिशत तक का प्रावधान किया गया है। दुम्का की निजी राय यह है कि यहां भी एक समान टैक्स का प्रावधान रखा जाना चाहिए था। मसलन 12 से लेकर 15 प्रतिशत तक का कोई भी मानक बनाकर तय किया जाना चाहिए था। इससे आमजन में भी असमंजस नहीं रहता कि सरकार ने किस वस्तु में कितना कर निर्धारित कर रखा है।

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