कुंवारी गांव की फाइल फोटो

खत्म न हो जाए कहीं उत्तराखंड के कुंवारी गांव का अस्तित्व, पड़ रही कुदरत की मार

उत्तराखण्ड ताजा खबर बागेश्वर

विनोद पनेरू, बागेश्वर। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का एक गांव प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। लोगों की जान सांसत में है। भूस्खलन और बड़े-बड़े बोल्डर गांव की उपजाऊ कृषि भूमि पर बरसने के साथ ही ग्रामीणों के आशियाने के लिए खतरा बने हुए हैं। कई रास्ते बंद हो चुके हैं। आवाजाही प्रभावित हो चुकी है तो दो वक्त की रोटी का इंतजाम कैसे हो कुछ सूझ नहीं रहा। हर तरह से जनजीवन अस्त- व्यस्त हो चुका है। गांव करीब दस दिन से गांव प्राकृतिक आपदा की ऐसी मार झेल रहा है कि इस गांव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। जिला प्रशासन की टीम लगातार नजर बनाए हुए है तो वैज्ञानिक भी कारण जानने की कोशिश में लगे हुए हैं। मगर ग्रामीणों को अपने पुश्तैनी घर और उपजाऊ जमीन की चिंता के साथ ही गांव का अस्तित्व मिटने का डर सता रहा है।
बागेश्वर के कपकोट क्षेत्र में पड़ता है कुंवारी गांव। करीब तीस परिवार और दो सौ की आबादी वाले इस गांव में नौ मार्च तक सब कुछ सामान्य चल रहा था। गांव में गेहूं की फसल बोई गई है। सब्जियों के खेत भी यहां देखे जा सकते हैं। राजमा के अलावा आलू की काफी खेती इस गांव में बड़े पैमाने पर होती है। मगर दस मार्च से प्रकृति इस गांव में ऐसा कहर बसपा रही है कि ग्रामीण सहमे हुए हैं और गांव का अस्तित्व खतरे मंें पड़ चुका है। पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। बड़े-बड़े बोल्डर घरों के आसपास गिरने के साथ ही कृषि योग्य भूमि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब तक काफी कृषि योग्य भूमि को नुकसान पहुंच चुका है। बागेश्वर जिला आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन के साथ ही एसडीआरफ की टीम पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लोगों को सुरथित स्थानों पर टेंटों में पहुंचा दिया गया है और उनके खानपान की पूरी व्यवस्था की जा रही है। मगर दस दिन बीतने के बाद भी रुक-रुक कर भूस्खलन हो रहा है। इधर फिलहाल वैज्ञानिक भी कोई खास निष्कर्ष नहीं निकाल पाए हैं कि बिना बारिश की इतने बड़े पैमाने पर आखिर कैसे भूस्खलन हो रहा है। वहीं ग्रामीण खासे परेशान और भयभीत हैं। लगातार भूस्खलन व पहाड़ी से बोल्डर गिरने के कारण उनकी आंखों के सामने बड़ी मेहनत से लगाई गई फसलें बर्बाद हो रही हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। वहीं आगामी दिनों में गांव में होने वाले मांगलिक कार्यो पर भी ग्रहण लगता नजर आ रहा है। बच्चाों की पढ़ाई चैपट हो गई है। वहीं जिला प्रशासन ने गांव के पुनर्वास के लिए रिपोर्ट शासन को भेज दी है। स्थिति जानने के लिए ड्रोन कैमरे की भी मदद ली जा रही है। भूस्खलन की मार से कुंवारी गांव का अस्तित्व खत्म न हो जाए इससे ग्रामीण खासे सहमे हुए हैं।
अगर आप चाहें तो कुंवारी गांव के लोगों की मदद को आगे आएं जिससे कि आपदा की स्थिति में ग्रामीणों को सहारा मिल सके।

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