पनिया के घर नेता आए, साथ में फोटो भी खिंचवाये, पर बेचारे की पीड़ा न जान पाये

चंद्रशेखर जोशी
हल्द्वानी। नाम पनी राम है, गांव वाले पनिया कहते हैं। उम्र 55 साल है, शरीर 70 के पार है। तीन बच्चे हैं, घर पर कोई नहीं हैं।
…शरीर में जब दम था तो पनीराम पूरे गांव की सेवा में तल्लीन रहते थे। न जाने कितना लोहा पीट कर औजारों में ढाल दिया, अब शरीर है कि चार कदम चलने में हांफता है। बेटी की शादी हो गई है, दो बेटे चार सौ किलोमीटर दूर मेरठ शहर में काम करते हैं। पनीराम और मधुली रोज बच्चों के घर आने के इंतजार में जीते चले जाते हैं। एक गाय और दो बकरियां भी उन्हें बच्चों के समान प्रिय हैं।
…बेमौसम बारिश ऐसी हुई कि मधुली को बुखार आ गया। पनीराम ने कहा, मधी तुझे ठंड लग गई है, मैं अंडे ले आता हूं और दुकान से दवा भी ले आऊंगा। वह बाजार जा रहे थे, रास्ते में मोहन सिंह का लड़का राजू मिल गया। बोला, पनिया कल तेरे घर चार-पांच नेता आएंगे। रात को वहीं रुकेंगे। पनीराम ने हाथ जोड़कर मना कर दिया। बोले-मधी बीमार है, दो झनों का भोजन बनाना तक मुश्किल है। मेरे घर में एक ही चारपाई है, वहीं पर जानवरों के लिए घास भी रखी है, अंदर वाला कमरा पिछली बरसात में टूट गया है, घर में राशन नहीं है, चार स्टील की थालियां हैं, आंगन में गड्ढे पड़े हैं। राजू ने उनकी एक नहीं सुनीं और बोला सब हो जाएगा।
…पनीराम की घबराहट बढ़ गई। पंडित-ठाकुरों की हर जिद पूरी करना धर्म था। रास्ते भर सोचते रहे। दुकान पहुंचने तक मधी की बीमारी दिमाग से गायब हो गई और मेहमानों की खातिरदारी हावी हो गई। दुकानदार से दो किलो चीनी और पावभर वाला चायपत्ती का पैकेट मांगा तो वह हैरत में पड़ गया। बोला, पनिया बेटे की शादी कर रहा है क्या। पनिया मुस्करा दिया और एक बिस्किट का पैकेट भी मांग लिया। 30 रुपए कम पड़ गए, दुकानदार ने कहा, कोई बात नहीं… बाद में दे जाना।
…पैर हैं कि आज पत्थर बन गए, आगे बढ़ते ही नहीं। घर पहुंचने तक सांझ भी ढल गई। आंगन में एक छाया दिखी तो मधुली को चैन आया। मधी ने हाथ में चाय थमाई और बोली, बहुत सिर दर्द हो रहा है, लाओ मैं दवा खा लेती हूं, तुम चाय पीओ। पनीराम के हाथ कांप उठे, जैसे-तैसे गिलास जमीन पर रखा। मधी ने झोला टटोला तो उसमें चाय, चीनी और बिस्किट का पैकेट देख कुछ समझ नहीं आया।
…पनीराम ने सारी बात बताई। मधी ने कहा, चलो कोई बात नहीं, सुबह बेटे को फोन करेंगे। पनीराम के शरीर में ताकत दौड़ पड़ी। उसने बिस्किट का पैकेट फाड़ा और मधी को चाय के साथ दो बिस्किट दे दिए। बिस्किट उसके लिए दवा की माफिक काम कर गए। बुखार कम लगने लगा। दोनों खाना खाकर सो गए। सुबह उठते ही आंगन से आवाज आई तो पति-पत्नी बाहर आए। बाहर राजू खड़ा था। बोला-शाम को नेता लोग आएंगे, घर को साफ कर देना और चलता बना। समझ नहीं आया कि साफ क्या करें, मधी बीमार, जानवरों का चारा, पानी भरने के लिए भी कोई साफ बड़ा बर्तन नहीं। खैर दोनों सफाई में जुट गए। आंगन जहां भी साबुत दिखा, गोबर से लिपाई कर दी। घर में तीन दरी और एक चादर थीं, धो दीं। पंडित-ठाकुरों से बर्तन मांगना उचित नहीं समझा। अपनी बिरादरी में मोहन राम लोनिवि में बेलदार है, वह कुछ दिनों पहले बाल्टी लाता दिखा था। पनीराम उसके घर गए और बाल्टी मांग लाए। थाली, बर्तन जो भी थे, मधी ने रगड़-रगड़ कर धो दिए। अपने लिए भोजन बनाने में बहुत देर हो गई, मधी को बुखार चढ़ता गया।
…शाम को चार भी नहीं बजे थे कि राजू 8-10 लड़कों को लेकर पहुंच गया। उनके पास कुछ बैग और गत्ते के डिब्बे थे। पनीराम से बिना कुछ पूछे लड़के अंदर गए और जहां साफ जगह दिखी वहीं सामान रख दिया। पनीराम ने जानना चाहा तो एक बोला शाम के लिए सामान है, किसी को हाथ मत लगाने देना। एक ने पूछा नेताओं के लिए भोजन की कुछ व्यवस्था की है तो सामान दे दो। खाना सेठ जी के घर बनेगा। दूध और दही देने की हिम्मत तो नहीं हुई, पनीराम ने घर में रखा आटा, चावल दे दिया।
…यही कोई सात बजे थे कि 10-12 लोगों का हुजूम पनीराम के घर को लपकता चला आया। आंगन के पास बंधी गाय को शहरी लोगों से डर लगता है। जैसे ही भीड़ आंगन में पहुंची तो गाय ने झटका मारा और रस्सी तोड़कर भाग निकली। कुर्सी, दरी लेकर आगे-आगे चल रहे लड़कों ने बैठने का इंतजाम किया। आंगन में सभी के बैठने की जगह नहीं थी सो अधिकतर 10 मिनट बाद सेठ जी के घर को चल दिए।
…नेता जी का दम घुटने लगा। बकरी, गाय के गोबर की गंध उनका दिमाग खराब करने लगी। कनखियों से चेले को जल्द चलने का इशारा किया। जल्दबाजी में चार-पांच लड़कों ने पैकेट खोले और भोजन परोस दिया। अब फोटो खींचने की बारी थी। नेता जी ने घर के मालिक को साथ बैठने के लिए बुलाया। पनी राम अंदर एक कोने में मधी का हाथ पकड़ कर बुखार माप रहे थे। दो-तीन लड़के अंदर घुसे और पनीराम का हाथ पकड़ कर बाहर ले गए। एक लड़के का पैर मधी के शरीर में पड़ा, उसकी हल्की चीख की किसी ने परवाह नहीं की।
…पनीराम हाथ जोड़कर बैठा रहा और नेता मुंह में भोजन ठूंसते रहे। पेट भरा तो सेठ जी के घर को जाने लगे। बड़े नेता ने पनीराम को पास बुलाया। बोला घर में सफाई रखो, प्रधानमंत्री जी को सफाई बहुत पसंद है। अब हर आदमी को साफ-सफाई करनी है। तुम्हारा शौचालय कहां है, तब तक एक लड़का बोल पड़ा-उधर है। पनीराम हाथ जोड़ कर हां-हां, जी-जी कहता रहा और नेता निकलते रहे। पनी राम नेताओं की गंदगी साफ करने में लगा तभी उसे मधी की याद आई। अंदर गया तो मधी बेहोश थी। बिरादरी के कुछ लोग वहीं पर थे। उन्होंने हाथ-पैर मले, मुंह में पानी डाला तो उसकी सांस लौट आई। अब सोचा कि सुबह अस्पताल ले जाएंगे। दोनों प्राणी भूखे ही सो गए। सुबह पनीराम की नींद खुली तो गाय की याद आई। दौड़कर गए तो खूंटा खाली था। उजाला होते ही गाय को ढूंढने गए, कहीं पता नहीं चला। अब मधी को अस्पताल ले जाना है, जेब में पैसा नहीं। कोई साथ चलने वाला भी नहीं। गांव में अब दो खेमे बन गए हैं। नेता के विरोधी पार्टी वाले उधार भी नहीं देंगे। पनी राम फिर बेलदार के पास गए। वहां पता चला कि उनके बच्चों ने गधेरे में गाय का अधखाया शव देखा है। पनीराम सिर पकड़ कर बेलदार के आंगन में गिर पड़े।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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