पहाड़ी पिसी नूण की धमक दूर तलक

कई समूह व संस्थाओं ने पहाड़ी पिसी नूण को बनाया स्वरोजगार का जरिया
कुमाऊं जनसंदेश डेस्क
हल्द्वानी। पिछले दिनों हल्द्वानी में लगे सरस मेले के दौरान गुजरात के वडोदरा से आया एक दंपति वहां लगे स्टाल्स पर एक खास ब्रांड के पहाड़ी पिसी नूण को तलाश रहा था। पूछने पर उसने बताया कि वहां उसके पड़ोस में रहने वाले एक उत्तराखंड निवासी ने उसे हल्द्वानी से ले जाकर पहाड़ी पिसी नूण खिलाया था। उन्हें यह नमक इतना अच्छा और चटखारेदार लगा कि अब वे इसे ज्यादा मात्रा में ले जाकर अपने दूसरे दोस्तों को भी खिलाना चाहते हैं। गुजराती दंपति की रुचि यह बताने के लिए काफी है कि पहाड़ी पिसी नूण की धमक अब दूर तलक हो चली है।
दरअसल पहाड़ के इस परंपरागत स्वाद वाले पिसी नूण ने पिछले कुछ वर्षों में एक कारोबार का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। कुमाऊं मंडल में हल्द्वानी, कोटाबाग, काकड़ी घाट और पिथौरागढ़ और गढ़वाल मंडल में पौड़ी, कर्णप्रयाग आदि कई स्थानों पर अनेक समूह व संस्थाएं पहाड़ी पिसी नूण के कारोबार में लगे हैं। बढ़ते शहरीकरण और व्यस्त होती जिंदगी के बावजूद परंपरागत घरेलू स्वाद की चाह के कारण इन समूहों को अपने पिसी नूण के लिए ग्राहक भी आसानी से मिल रहे हैं।
पहले-पहल इस नूण की बिक्री कुछ मेलों में लगने वाले स्टालों और ग्राम्य विकास विभाग के हिमान्या मार्ट तक सीमित थी, लेकिन काकड़ी घाट के हिमालयन फ्लेवर ने सबसे पहले वहां एक दुकान खोलकर यह बताया कि पहाड़ी पिसी नूण पूरी तरह एक कारोबार भी हो सकता है। हिमालयन फ्लेवर ने इस कारोबार को एक दुकान तक सीमित रखा, लेकिन हल्द्वानी के ब्रांड बूढ़ी आमा ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए इसे संगठित कारोबार का रूप दे दिया और बड़ी कंपनियों के उत्पाद की तरह इस नूण और रेडीमेड भांग चटनी को दुकान-दुकान पहुंचाना शुरू किया। नतीजतन यह नूण अधिकाधिक ग्राहकों की पहुंच तक होने लगा।

पहाड़ी पिसू नूण
पहाड़ी पिसू नूण

आज स्थिति यह है कि पहाड़ी पिसी नूण का क्रेज बढ़ता ही जा रहा है। हल्द्वानी की अधिकांश दुकानों में यह अब दूसरे उत्पादों की तरह खूब बिकने लगा है। जिसे न केवल स्थानीय लोग खरीद रहे हैं, बल्कि देश के दूसरे प्रांतों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी खरीदकर ले जा रहे हैं और गुजराती, मराठी, बंगाली, पंजाबियों आदि को पिसी नूण का मुरीद बना रहे हैं। यही नहीं विदेश में रहने वाले भी यहां से अपने काम पर विदेश लौटते वक्त इसे उत्तराखंड की सौगात के तौर पर ले जाना नहीं भूलते।
पहाड़ी पिसी नूण का कारोबार कितना बड़ा होता जा रहा है, इसे लेकर बूढ़ी आमा ब्रांड की संचालिका श्रीमती उषा बताती हैं कि छह माह पहले जहां वे प्रति माह सिर्फ आठ-दस हजार का नूण बेच रहे थे, वहीं आज सिर्फ हल्द्वानी में ही उनका सत्तर से अस्सी हजार का नूण व भांग की चटनी बिक रहे हैं, जो क्रमोतर बढ़ोतरी की ओर है।

– अगर आपके पास भी स्वरोजगार या पहाड़ी उत्पादों से जुड़ी कोई स्टोरी है तो हमें मेल करें- vinodpaneru123@gmail.com

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published.