आते ही छा गई हल्द्वानी के लेखक चंद्रशेखर जोशी की ‘धरती के चुभते सवाल’ किताब, आप भी पढ़ें

शहर से गांव की हर हकीकत समेटे है धरती के चुभते सवाल, पुस्तक की भारी मांग
हल्द्वानी। वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक मुददों पर निरंतर कलम चलाने वाले चंद्रशेखर जोशी की चंद दिन पहले ही प्रकाशित धरती के चुभते सवाल पुस्तक की लोगों के बीच भारी मांग देखने को मिल रही है। यह स्थिति तब है कि इसका किसी समारोह या प्रचार के ही आम लोगों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। किताब में लेखक ने शहर से लेकर गांव की हर स्थिति और हालातों और परिस्थितियों, बूढे़, नौजवान व बच्चों की मनोदशा को बेहद की सरल शब्दों में हकीकत के साथ इस अंदाज में बयां किया है कि पढ़ने में कम रुचि रखने वाले कों भी यह पुस्तक अवश्य पसंद आएगी। पुस्तक शीर्षक की भी काफी लोगों ने बेहद सराहना की है। जहां गांव व शहर की सच्चाई के साथ वर्णन किया गया है वहीं जानकारी के लिहाज से विदेशों के रहन-सहन, वैज्ञानिक जानकारी के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में कलम चलाई गई है। वहीं जितने लोगों को भी पुस्तक प्रकाशन की जानकारी मिल रही है वह पुस्तक की मांग करने के साथ ही पढ़ने को भी लालायित हैं।

लेखक चंद्रशेखर जोशी
लेखक चंद्रशेखर जोशी

मूलरूप से अल्मोड़ा के रहने वाले लेखक चंद्रशेखर जोशी वर्तमान में हल्द्वानी में रहते हैं। 30 जून 1973 को जन्मे जोशी गणित से एमएससी डिग्री धारी हैं। किताब में पलायन, बेरोजगारी, नौजवानों की दशा, सामाजिक प्रथा, अमीरी-गरीबी, शोषण, राजनीति का गिरता स्तर, सामाजिक असमानता समेत हर मुददे पर बेहद सरल शब्दों का इस्तेमाल कर रोचक लेखन की कलम चलाई है।
पुस्तक प्रकाशन की सूचना फेंसबुक में सार्वजनिक होते ही लोगों का शुभकामना देने के साथ ही पुस्तक की मांग के संदेश काफी संख्या में आने शुरू हो गए हैं। धरती के चुभते सवाल की जिस तरह से शुरुआती मांग दिखाई दे रही है उससे लगता है कि लेखक को जल्द ही इसका दूसरा संस्करण भी बाजार में लाना पड़ेगा।
फेसबुक में पुस्तक को लेकर इस तरह की आ रही प्रतिक्रियांएं

O.p. Pandey अभी पढ़ ही रहा हूँ बधाई चंद्रशेखर भाई निसंदेह यह रोमांचक ग्राह्य और ज्ञानवर्धक किस्से कहानी का संग्रह है ही साथ में गहरे सामाजिक चिंतन की पोथी भी है । लेखन में विज्ञान का पुट झलकना लाजिमी है , हिंदी का बेहतरीन प्रयोग किया है लेखन में बैज्ञानिक तरीके से अपनी बात को तारतम्य से लिखना इतना आसान नहीं , जो विज्ञान के विद्यार्थी द्वारा इतनी सहजता से किया गया है ,वाकई काबिले तारिफ है , घटनाओं , समसामयिक विषयों से पाठकों को कनेक्ट हो जाना , इस पुस्तक की सबसे उत्तम बात लगी
एक पाठक के तौर पर कह सकता हूँ कुल मिलाकर यह हालिया लेखन का बेहतरीन सम्मिश्रण है ।
बहुत सुभकामनाएँ …..
अभी और आना बांकी है …

Kirti Kiran Singh Karakoti हार्दिक बधाई एवं प्रणाम जोशी जी । यदा कदा आप से फेसबुक पर वैचारिक मतभेद होने का मजा भी कुछ अलग है । क्या ये किताब कैश में हल्द्वानी में उपलब्ध है ? इसी बहाने आप से शुभाशीष प्राप्त करने का मौका भी मिल जायेगा ।
Naveen Joshi वाह वाह… क्या बात है.. बहुत बहुत बहुत ही… बहुत बधाई…. किताब भेज दीजिए… राशि हम भेजते हैं
Aftab Alam पुस्तक लेखन की ढेरों बधाई शुभकामनाए!
बिलकुल आपकी किताब जन उपयोगी सिद्ध होगी, आपकी लेखनी कमल की होती है जो समाज के हर स्तर से अध्यन्न किए हुए रहते हैं।
मैं जरूर पुस्तक को मंगवाने का प्रयास करूंगा, भविष्य में अगर पुनः इस प्रकार के पुस्तक को आप प्रकाशन करेंगे तो कृपया “नवल जोशी सर की कुछ लेखनी जरूर लीजिएगा। ये मेरी एक राय है
Rajendra Sharma बहुत खूब,,
पुस्तक का रूप देकर अच्छा किया है जोशी जी।
1 प्रति मेरी भी बुक
पं.रवि शास्त्री वाह सर जी मज़ा आ गया धमाकेदार परफॉर्मेंस! शुभकामनाएं
Bhagwan Singh Chauhan चंद्र शेखर जोशी जी यह पुस्तक कैसे मिल पाएगी और कहां मिलेगी
Veeresh Kumar सिग्नेचर करके एक कॉपी अलग रख दो हल्द्वानी आकर ले लूंगा।
Bachi Singh Bisht ये बहुत अच्छा किया। बधाई। हम पढ़ेंगे।
Ajay Shastri नकद पैसे देके अल्मोड़ा किताबघर में मिल सकती हैं, क्या ?
Shiv Shankar Singh Khati जोशी जी नमस्कार। खुशी हुई, आपने पुस्तक के रूप में संकलन कर के एकसाथ बहुत सी ज्ञानोपयोगी सामग्री परोस दी है। भांति भांति के स्वादिष्ट व्यंजनों से युक्त थाली प्राप्त करने को मैं भी व्यग्र हूँ।
आपको बधाई एवं धन्यवाद।
Kishan Singh नमस्कार सर, बहुत सुन्दर,एक कापी मेरे लिऐ भी। पता इनबाक्स कर रहाहूँ

कुमाऊं जनसंदेश न्यूज पोर्टल की ओर से भी लेखक को बहुत सारी शुभकामनाएं।

किताब कैसे प्राप्त करें
. ई.मेल.csjoshihld@gmail.com
मूल्य. 250 रुपयेए डाक खर्च अलग

बैंक एकउंट -CHANDRA SHEKHAR JOSHI 
PANJAB NATIONAL BANK HALDWANI, NAINITAL 
A/C No. .0196000100340905
IFSC Code–PUNB0019600

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