उपलब्धि: गौलापार के किसान नरेंद्र को दिल्ली में इन्नोवेटिव फार्मर अवार्ड

दिल्ली में इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुआ सम्मान
कुमाऊं जनसंदेश डेस्क
दिल्ली/हल्द्वानी। उत्तराखंड के गौलापार (हल्द्वानी) के प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह मेहरा को एक और सम्मान से नवाजा गया है। कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और अन्वेषण सम्बंधी कार्य करने पर उन्हें गुरुवार को दिल्ली में इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट् यूट की ओर से इन्नोवेटिव फार्मर अवार्ड 2019 से सम्मानित किया गया है। इससे पहले भी प्रगतिशील किसान मेहरा प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई मंचों से सम्मानित व पुरस्कृत हो चुके हैं। गुरुवार को दिल्ली में इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट् यूट की ओर से पांच से सात मार्च तक नवोन्मेषी किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

किसान मेहरा को सम्मानित करते अधिकारी
किसान मेहरा को सम्मानित करते अधिकारी

इसमें पूरे देश से कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट और खोज सम्बंधी कार्य करने वाले किसानों को पूसा कृषि विज्ञान मेले में बुलाया गया था। इसमें गौलापार, हल्द्वानी के प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह मेहरा को भी आंमत्रित किया था। उन्हें कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने और गेहूं की नरेंद्र-09 प्रजाति विकसित करने और कम पानी मेें धान की अच्छी पैदावार व सहफसली उत्पादन करने पर इन्न्नोवेटिव फार्मर अवार्ड 2019 से सम्मानित किया गया है। इससे पहले कृषि विवि और राज्य स्तर पर दो बार मुख्यमंत्री उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। साथ ही कृषि विभाग नैनीताल की ओर से 2015-2016 में किसान श्री अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
हिंदी समाचार पोर्टल कुमाऊं जनसंदेश से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह मेहरा ने बताया कि यह सम्मान एक किसान का सम्मान है। कहा कि सम्मान मिलने से सभी को अच्छा लगता है और प्रोत्साहन मिलता है। कहा कि वही खुशी मुझे भी मिल रही है और भविष्य में कृषि और किसान हित में कार्य करने के लिए और ऊर्जा मिल रही है। कहा कि उन्होंने कुछ सालों पहले गेहूं की नरेंद्र-09 प्रजाति विकसित की है। यह सामान्य किस्मों से अधिक उत्पादन दे रही है और किसानों में लोकप्रिय हो रही है। इसके अलावा गोंद-कतीरा व गुड़ के लेप से धान उगाने में कम पानी का प्रयोग होता है। इससे पानी और पैसे दोनों की बचत होती है। कहा कि उन्हें कृषि में विशेष कार्य करने के लिए कृषि विभाग और पंत विवि के विशेषज्ञों का भी समय-समय पर सहयोग मिलता रहता है। कहा कि वर्तमान में वे जैविक खेती की दिशा में भी काम कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। क्योंकि खादों के अधिक इस्तेमाल से खाने की थाली जहरीली हो रही है। जैविक खेती में गोबर की खाद का इस्तेमाल कर पौष्टिक और गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न का उत्पादन किया जाता है। कार्यक्रम में आईएआरआई के प्रिंसिपल डा. जेपीएस डबास वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. नफीस अहमद सहित तमाम लोग मौजूद थे।

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